सड़कों के बीच गड्ढे और उसमें भरा पानी व कीचड़...। दिन में यहां से गुजरने में गिरने का खतरा तो दिन ढलते ही स्नैचरों का खौफ। यह हाल है इंडस्ट्रियल एरिया फेज-दो का।
खस्ताहाल सड़कें और स्ट्रीट लाइट की कमी से हालात इतने बदतर हो चुके हैं, यहां हमेशा खतरा मंडराता रहता है।
इसी फेज में सैकड़ों औद्योगिक इकाईयां हैं और हजारों की संख्या में काम करने वाले कर्मचारी रोजाना इधर से गुजरते हैं। इन इकाइयों से करोड़ों का टैक्स जाता है।
डिप्टी मेयर का वार्ड और शहर का एकमात्र औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद यहां के लोगों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-फेज-दो के प्लॉट नंबर-22 से 32 के बीच सड़कों की स्थिति इस कदर बदहाल है कि यहां से छोटे वाहनों के लिए भी गुजरना मुश्किल है। सड़क कम और गड्ढे ज्यादा दिखते हैं।
उद्यमी आरके गर्ग के मुताबिक, कई महीनों से सड़कें खस्ताहाल हैं, लेकिन इसे ठीक नहीं कराया जा रहा है। पीके गोसाईं और पवन मित्तल ने भी सड़कों की बदहाली व स्ट्रीट लाइटों की कमी से होने वाली मुश्किलें बताईं।
सैलरी मिलते ही छीन लेते हैं रुपये
उद्यमी प्रवीण आत्रेय के मुताबिक, पूरे इंडस्ट्रियल एरिया में बदहाल सड़कें और स्ट्रीट लाइट से बेहद परेशानी है।
अधिकतर जगहों पर स्ट्रीट लाइट नहीं होने की वजह से कई बार सैलरी लेकर निकलते ही कर्मियों से रुपये छीन लिए गए हैं।
रास्ते में अंधेरा होने की वजह से पूरे महीने की कमाई चंद मिनटो में खत्म हो जाती है। इसलिए पुलिस गश्त भी बढ़ाया जाना चाहिए।