उन्होंने कहा कि अब फिर एक वीडियो के माध्यम से यह पता लगा है कि करीब 89 लड़कियों ने मस्कट के भारतीय दूतावास में शरण ली हुई है, जबकि कुछ लड़कियां अभी भी अपने खरीददारों के पंजे में से निकल नहीं सकीं। इन 89 लड़कियों में से छह लड़कियां पंजाब की हैं। करीब 60 प्रतिशत लड़कियां हैदराबाद की हैं।
उन्होंने कहा कि अरब देशों में अवैध ढंग से फंसीं 100 से ज्यादा लड़कियों को वापस लाने में इमीग्रेशन के जुर्माने, ओवरस्टे की पेनाल्टी और कोर्ट के फीस में डेढ़ करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। अगर कहीं उनके खरीददारों को उनका खरीद मूल्य वापस करना पड़ा तो यह आंकड़ा कई गुणा बढ़ने की उम्मीद है, जो इन लड़कियों के परिवार वहन नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि यह सारा खर्च वहन करके इन लड़कियों को वापस लाने को तैयार हैं, लेकिन इस गंभीर मसले पर भारत सरकार की विशेष मदद की जरूरत है। बहुत सी लड़कियों के पास पासपोर्ट व अन्य जरूरी दस्तावेज नहीं हैं। ये दस्तावेज भारत सरकार की मदद के बिना किसी भी हालत में पूरे नहीं हो सकते हैं।
बताते चलें कि कुछ दिन पहले मस्कट के भारतीय दूतावास में भारत वापस लौटने के लिए गिडगिड़ाने वाली कुछ पंजाबी लड़कियों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसे देखकर सरबत दा भला ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. एसपीएस ओबराय ने इन लड़कियों को वापस लाने की पहलकदमी की है। इससे पहले डॉ. ओबराय ने दुबई में करोड़ों रुपये की ब्लड मनी देकर कई युवाओं को फांसी के फंदे से बचाया था।