औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट्स को अब मेडिकल फिटनेस से भी गुजरना होगा। मेडिकल फिटनेस में पास होने के बाद ही स्टूडेंट्स का प्रवेश तय माना जाएगा। औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के महानिदेशक ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।
शैक्षणिक सत्र 2015-16 से आईटीआई की प्रवेश प्रक्रिया में भी अहम बदलाव किया गया है। अक्सर देखने में आता था कि स्टूडेंट्स अपने मनपसंद ट्रेड में प्रवेश ले लेता था, फिर भले ही वह उस ट्रेड के लिए शारीरिक रूप से सक्षम हो या नहीं। ऐसे में मामूली रूप से अशक्त छात्रों को भी बाद में काफी परेशानी होती थी। इससे बचने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग ने वर्तमान सत्र से प्रवेश के समय ही मेडिकल टेस्ट अनिवार्य कर दिया है।
इस सत्र से प्रवेश की कागजी कार्रवाई के बाद सभी स्टूडेंट्स का मेडिकल कराया जाएगा। यदि विद्यार्थी के शरीर में कोई सामान्य चोट है और उपचार के बाद वह ठीक हो सकती है तो इसके लिए उसे एक सप्ताह या दस दिन का समय दिया जाएगा। लेकिन अगर मेडिकल टेस्ट में शारीरिक रूप से सक्षम नहीं मिलता तो प्रवेश रद माना जाएगा। औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के महानिदेशक ने इस संबंध में प्रदेश की सभी आईटीआई को आदेश जारी कर दिए हैं।
अशक्तों के लिए तीन प्रतिशत सीटें आरक्षण
आईटीआई में प्रवेश के लिए स्टूडेंट्स को एससी-एसटी समेत अन्य सभी कैटेगिरी को अलग-अलग आरक्षण दिया गया है। इसके साथ ही अशक्त विद्यार्थियों के लिए भी संस्थान की कुल सीटों में तीन प्रतिशत आरक्षण होता है।
वर्जन
इस सत्र से स्टूडेंट्स के लिए मेडिकल अनिवार्य कर दिया गया है। मेडिकल में फिट होने के बाद ही स्टूडेंट्स का प्रवेश कंफर्म माना जाएगा।
- प्रदीप दहिया, प्रधानाचार्य राजकीय मॉडल आईटीआई, रोहतक।