सरकार बुलेट ट्रेन की बात करती है, पहले शताब्दी के हालात तो सुधार लें। ये एक्सक्लूसिव लाइव रिपोर्ट देखेंगे तो खामियां नजर आ जाएंगी। चंडीगढ़ की वीवीआईपी ट्रेन चंडीगढ़-नई दिल्ली शताब्दी का लुक तो बदला है, मगर सुविधाएं जस की तस हैं, उनमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। अधिकतर कोचों के फ्रीजर और बॉयलर खराब हैं। कई कोचों में खिड़कियों के चटके शीशे भी दिख जाएंगे।
शताब्दी में सवार होते ही मच्छर और काकरोच स्वागत के लिए तैयार मिलते हैं। ट्रेन के करनाल से आगे बढ़ते ही एसी कोचों में यात्रियों के पसीने भी छूटने लगते हैं। सिर्फ इतना हीं नहीं, सफर के दौरान लंच तो परोसा जाएगा, लेकिन उसमें कोई ऑप्शन नहीं है। अगर आप डेली शताब्दी में सफर करते हैं, तो एक तरह का खाना खाकर बोर हो जाएंगे।
देश की सबसे अच्छी और सुविधाजनक मानी जाने वाली ट्रेन की सुविधाओं का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खाने पीने की वस्तुओं को ठंडा रखने के लिए फ्रीजर में बाहर से मंगाकर बर्फ डाली जाती है। एक तरफ चेयरकारों में बैठे यात्री गर्मी से बेहाल दिखे। दिन वीरवार सुबह 11.30 बजे। चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के बीच शताब्दी में बैठने की उत्सुकता।
तभी शताब्दी के एक कोच के गेट पर बर्फ से लदी रेहड़ी पर नजर पड़ी। यहां कर्मचारी बर्फ को टुकड़ों में कर ट्रे के जरिये कोचों में बने कैटरिंग तक पहुंचा रहे थे, पूछने पर पता चला कि ट्रेन की बोगियों में लगे फ्रीजर खराब हैं। इसलिए बर्फ खरीदकर पानी की बोतलें, आइसक्रीम और दही जैसे खाने-पीने के सामान को ठंडा किया जाता है, उसके बाद यात्रियों को सप्लाई दी जाती है।
खाना खाकर यात्री संतुष्ट नहीं दिखे
चंडीगढ़-नई दिल्ली शताब्दी
वहीं, दूसरी ओर कैटरिंग की ओर से दोपहर 1.30 बजे लंच की थाली में परोसा गया खाना खाकर यात्री संतुष्ट नहीं दिखे। लंच के बाद यात्रियों से पूछा गया कि शताब्दी का खाना कैसा लगा, तो उनका जवाब था कि एक ही टाइप खाना खाकर बोर हो गए हैं, अब ऑप्शन चाहिए। कुछ ने कहा कि खाने के स्वाद में भी सुधार की जरूरत है।
जब टीम ने इसकी जांच की तो पाया कि थाली में परोसी गई पनीर की सब्जी, दाल फ्राई, रोटी व चावल के साथ दही औसत दर्जे की है। खाने के क्वांटिटी और क्वालिटी दोनों में भी सुधार की जरूरत है, क्योंकि पनीर की सब्जी में ग्रेवी ज्यादा, पनीर कम था। दाल को फ्राई तो किया गया था, लेकिन पानी अधिक होने के चलते पैसेंजर को रास नहीं आई।
एक यात्री ने कहा कि पानी के अनुपात में दाल की मात्रा बहुत कम है। डीप फ्रीजर खराब होने से यात्रियों को खाने के साथ परोसी गई दही भी खट्टी हो गई थी। शताब्दी एक्सप्रेस में भोजन का स्तर लगातार गिरने के कारण यात्री अब घर से खाना ला रहे हैं। अति विशिष्ट दर्जे की इस ट्रेन की हालत सामान्य एक्सप्रेस जैसी होती जा रही है।
वेलकम ड्रिंक : 20 रुपये के जूस के बजाय सर्व किया नींबू पानी
दोपहर 12 बजे। शताब्दी चंडीगढ़ से नई दिल्ली के लिए रवाना हुई। 12.14 बजे यात्रियों को कैटरिंग में तैनात कर्मचारियों ने वेलकम जूस सर्व किया, लेकिन 20 रुपये के जूस के नाम पर यात्रियों को 12 रुपये का नींबू पानी पिलाया जा रहा था। नियम के मुताबिक जूस सर्व होना चाहिए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक कोच में करीब 120 सीट होती हैं। प्रति व्यक्ति करीब पांच से आठ रुपये की बचत। कहां जा रहा है, ये पैसा।
चंडीगढ़ से अंबाला का सफर 38 मिनट में
चंडीगढ़-नई दिल्ली शताब्दी
12 बजे चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से चलने वाली शताब्दी को अंबाला तक पहुंचने में 38 मिनट लगे। 44 किमी की दूरी तय करने में 38 मिनट का समय लग गया। जब जांच की गई तो पता चला कि चंडीगढ़-अंबाला के बीच में .5 से तीन डिग्री तक के 16 कर्व ट्रैक हैं। इनमें तीन कर्व तीन डिग्री के हैं। इस कर्व के शुरू होने से पहले ही शताब्दी की स्पीड कम करनी पड़ती है, इसलिए अंबाला तक शताब्दी अपनी स्पीड नहीं पकड़ पाती।
सूप सर्व किया तो पता चला सीटों के पीछे लगे ट्रे टूटे हैं
अंबाला से 12.42 बजे शताब्दी दिल्ली के लिए रवाना हुई। अंबाला से करनाल के बीच लंच से पहले यात्रियों के लिए सूप सर्व किया गया। अगल-अलग कोचों में जांच के बाद पता चला कि सीट के पीछे लगे ट्रे भी कई कोचों में टूटे हैं। यात्री सूप हाथ में ही लेकर पी रहे हैं।
लंच से पहले हर कोच का किया मुआयना
करनाल पहुंचने से पहले ट्रेन के कोचों में बने कैटरिंग की जांच की तो पाया कि अधिकतर कोच में लगे बॉयलर और फ्रीजर खराब हैं। जो लोगों को पीने के लिए पानी दिया जा रहा है, वह ठंडा नहीं है। कुछ कोचों के बॉयलर में लीकेज भी था। जहां से पानी टपक रहा था। सी-6 कोच के कैटरिंग में पानी गर्म करने के लिए लगे बॉयलर में लीकेज के चलते फर्श पर पूरा पानी फैल गया था। इस पर नजर पड़ते ही कैटरिंग वालों ने साफ कर दिया।
तीस फीसदी ने खाने को अच्छा बताया, 50 फीसदी ने कहा विकल्प नहीं
चंडीगढ़-नई दिल्ली शताब्दी
करनाल के बाद दोपहर बाद 1.30 बजे कैटरिंग कर्मचारियों की ओर से लंच सर्व किया गया। तीस फीसदी यात्रियों ने खाने को अच्छा बताया, वहीं अक्सर दोपहर की शताब्दी में सफर करने वाले यात्री बोले खाने में कोई ऑप्शन नहीं है, जबकि 20 फीसदी बोले खाने में स्वाद नहीं है।
शताब्दी में 40 सीटें खाली
चंडीगढ़-नई दिल्ली शताब्दी में 40 सीटें खाली पड़ी थीं। यात्रियों का कहना है कि फ्लैक्सी सिस्टम के चक्कर में सीटें खाली रह जाती हैं।
यह है फ्लैक्सी फेयर सिस्टम
एविएशन सेक्टर की तरह रेलवे ने फ्लेक्सी फेयर सिस्टम की शुरूआत की है। इस फेयर सिस्टम में जैसे-जैसे ट्रेनों में सीटें भरती जाएंगी, उसके किराए में उतनी ज्यादा बढ़ोतरी होती जाएगी। उदाहरण देकर आपको समझाएं तो अभी शताब्दी एक्सप्रेस से चंडीगढ़ से नई दिल्ली जाने में चेयरकार में 404 रुपये बेस प्राइस के हिसाब से किराया चुकाना पड़ता है।
इसके साथ 40 रुपये आरक्षण शुल्क, 45 रुपये सुपर फास्ट चार्ज, जीएसटी व कैटरिंग चार्ज देना पड़ता है। लेकिन फ्लेक्सी प्राइसिंग सिस्टम लागू होने के बाद हर 10% सीटें बुक होने पर किराया बेसिक फेयर 10% बढ़ जाएगा। यानी ट्रेन की 10 प्रतिशत भरने के बाद आपको बेस फेयर पर 10 प्रतिशत की वृद्धि हो जाएगी। यात्री जिसने पहले टिकट की बुकिंग कराई वह फ्लेक्सी फेयर से बच जाता है।
40 फीसदी फायर स्टिंगरों में डेट मेंशन नहीं
चंडीगढ़-नई दिल्ली शताब्दी
सफर के शुरुआत में जैसे ही शताब्दी चंडीगढ़ से दिल्ली के लिए रवाना हुई, अमर उजाला की टीम ने ट्रेन में लगे फायर स्टिंगों की जांच शुरू कर दी। इनमें करीब 60 फीसदी फायर स्टिंगर ही ठीक पाए गए। वहीं, 40 फीसदी फायर स्टिंगरों में डेट का उल्लेख नहीं था कि उसकी एक्सपायरी कब है और उसकी रिफिलिंग कब की गई है। कुछ फायर स्टिंगरों के पाइपों में जंग लगे थे। जिसकी सच्चाई तस्वीरें बयां कर रही हैं।
लुक बदला, पर सही मेंटेनेंस नहीं
स्वर्ण प्रोजेक्ट के तहत शताब्दी में सीनरी बदल कर नया लुक बेशक दे दिया गया हो, लेकिन कोचों की प्रॉपर मेंटेनेंस नहीं की गई। फ्लैक्सी फेयर के तहत ज्यादा किराया चुकाने के बावजूद सीट की टूटी हुई ट्रे और पानी भी ठंडा नहीं मिलता। वहीं, ट्रेन में शौचालय की बदबू से यात्री परेशान रहते हैं।
क्या कहते हैं डीआरएम
अंबाला मंडल के डीआरएम दिनेश चंद्र शर्मा से जब इस संबंध में बात की गई, तो उन्होंने कहा कि अभी वह व्यस्त हैं और शताब्दी के इश्यू हैं उन्हें लिखित में मैसेज करें। सुधार करवाया जाएगा।