देश की नई शिक्षा नीति तैयार की जा रही है। इसकी प्रारूप सामने आया है, जिस पर मानव संसाधन एवं विकास मंत्रायल ने लोगों से सुझाव मांगे हैं। इसमें बच्चों को मिड-डे मील में लंच के साथ ब्रेकफास्ट देने का प्रावधान किया गया है। इस प्रस्ताव को काफी सराहा जा रहा है। हरियाणा के शिक्षाविद् बजीर सिंह के अलावा शिक्षक दीपक गोस्वामी व धर्मबीर कौशिक अपने सुझाव भेजेंगे।
अभी सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों को मिड-डे मील में दोपहर का भोजन दिया जाता है। इसमें स्कूलों ने दिन के हिसाब से अलग-अलग मेन्यू बनाया हुआ है। आमतौर पर दाल-चावल, चना-चावल, चपाती-सब्जी इत्यादि दी जाती है। विशेष मौकों पर अनेक स्कूल अपनी ओर से कई बार मटर पनीर इत्यादि भी परोस देते हैं।
ब्रेकफास्ट का नई नीति में प्रावधान केंद्र सरकार ने अधिक से अधिक बच्चों को सरकारी स्कूलों की ओर आकर्षित करने के मद्देनजर किया है। ब्रेकफास्ट में छात्रों को दूध-ब्रेड, अंडा या केले आदि दिए जा सकते हैं। हरियाणा सरकार पहले से ही आंगनबाड़ी में यह सुविधा शुरू कराने के प्रयास में जुटी हुई है।
सरकार ने सीआईआई के अलावा बड़े औद्योगिक घरानों को पत्र लिखकर आंगनबाड़ी में नौनिहालों को दूध, ब्रेड, अंडा व केला इत्यादि कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत उपलब्ध कराने की बात कही थी।