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8 साल की कानूनी जंग लड़ने के बाद मिली पूर्व फौजी को पेंशन, 40 फीसदी दृष्टिहीन भी है

Sun, 16 Sep 2018 09:59 AM IST
अमित शर्मा, अमर उजाला, मोहाली
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पूर्व फौजी
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एक पूर्व फौजी को 48 साल की लंबी जंग के बाद पेंशन मिल पाई है। फौजी के इस संघर्ष में एक्स सर्विसमैन ग्रीवांसेस सेल की तरफ से पूरा सहयोग किया गया। मोहाली स्थित आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल ने बनूड़ निवासी फौजी महिंदर सिंह के हक में फैसला सुनाया है। वे 40 फीसदी दृष्टिहीन हैं। उन्हें पिछली सारी 40 फीसदी पेंशन करीब पांच लाख रुपये और पांच से छह हजार मासिक डिसेबिलिटी पेंशन मिलेगी।
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यह जानकारी कर्नल एसएस सोही ने दी। कर्नल सोही ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि महिंदर सिंह नौकरी में संतुलित खाना न मिलने के चलते दृष्टिहीन हुए थे। वे महिंदर सिंह को पूरी पेंशन दिए जाने की मांग को लेकर आगे मुकदमा दर्ज करेंगे। महिंदर सिंह ने 3 फरवरी 1968 को 16 सिख रेजिमेंट में सिपाही के रूप में ज्वाइन किया था। जब महिंदर सिंह की डिवीजन ट्रेनिंग झांसी के नजदीक चल रही थी तो वे गिर गए थे।

साथ ही उन्होंने अपने एक साथी को खूनदान भी किया था। इस दौरान उनकी आंखों की रोशनी में थोड़ी समस्या आनी शुरू हो गई थी। वे कई बार मिलिट्री अस्पताल भोपाल और गाजियाबाद में दाखिल रहे। 20 जून 1970 को उन्हें सेना ने अनफिट घोषित करते हुए नौकरी से डिस्चार्ज कर दिया था। कहा कि जल्दी ही डिसेबिलिटी पेंशन लग जाएगी। इसके बाद उन्हें पेंशन नहीं दी गई। इस कारण उनके परिवार को गरीबी के हालात से गुजरना पड़ा। उन्होंने कहा कि गरीबी के कारण उनकी पत्नी लोगों के घरों में काम करने के लिए मजबूर हो गई।
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चार साल पहले संस्था से किया था संपर्क
कर्नल सोही ने बताया कि करीब चार साल पहले महिंदर सिंह ने उनकी संस्था से संपर्क किया और अपनी स्थिति के बारे में जानकारी दी। इसके बाद उनकी तरफ से इस मामले की पैरवी शुरू की गई। इस दौरान जिला सैनिक भलाई बोर्ड व कई संस्थाओं की तरफ से महिंदर सिंह के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। चार-पांच महीने संघर्ष के बाद महिंदर सिंह की पेंशन के लिए आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल चंडीमंदिर में मुकदमा दायर किया गया। एडवोकेट आरएन ओझा ने कई दलीलों के बाद केस जीता।
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