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चीन से तनाव के बीच वायुसेना के 'गरुड़' कमांडो बनेंगे और भी घातक, दी जाएगी विश्वस्तरीय ट्रेनिंग

Wed, 04 Nov 2020 03:46 PM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • छोटी मगर घातक के सिद्धांतों पर गरुड़ कमांडो को तैयार किया जाएगा
  • चीन के साथ चल रही तनातनी के चलते यह ट्रेनिंग खास मायने रखेगी
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फाइल फोटो।
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विस्तार
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वायुसेना की स्पेशल कमांडो टीम 'गरुड़' अब और घातक बनेगी। इन कमांडो को अब वर्ल्ड स्पेशल फोर्स सरीखे ट्रेनिंग से लैस किया जा रहा है। चीन के साथ चल रही तनातनी के चलते यह ट्रेनिंग कई मायनों में खास मानी जा रही है। गरुड़ इंडियन एयरफोर्स की विशेष कमांडो फोर्स है। नेवी के मार्कोस और आर्मी के पैरा कमांडो की तर्ज पर एयरफोर्स ने अपनी इस कमांडो फोर्स का गठन किया था। करीब 16 साल पहले इस फोर्स को एयरफोर्स में शामिल किया गया था।

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जमीन, आसमान और पानी में हर तरह के ऑपरेशन को बखूबी अंजाम देने में महारथी इन कमांडो को एयरफोर्स ने अपने एयरबॉर्न ऑपरेशंस, एयरफील्ड सीजर व काउंटर टेरेरिज्म ऑपरेशंस के लिहाज से भी विशेष रूप से प्रशिक्षित किया है। स्ट्राइकर (घर में घुसकर मारना) की भूमिका में भी ये कमांडो बेहद खतरनाक माने जाते हैं। 

अब इन्हीं गरुड़ कमांडो को एयरफोर्स वर्ल्ड स्पेशल फोर्स की तरह से प्रशिक्षित कर रही है। एयरफोर्स सूत्रों ने बताया कि दुनिया की लगभग सभी स्पेशल फोर्स एसटीआईई (स्माल टीम इंसर्शन एंड एक्सट्रेक्शन) के सिद्धांत पर काम करती हैं। जिसका मतलब होता है छोटी, घातक और पूरी तरह आत्मनिर्भर टीम। 

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एयरफोर्स के गरुड़ कमांडो भी इसी सिद्धांत पर प्रशिक्षित किए जा रहे हैं। जिससे उनकी क्षमताओं में और इजाफा होगा और ये फोर्स और खतरनाक बनेगी। गरुड़ कमांडो इस वक्त अत्याधुनिक हथियारों, टोही उपकरणों समेत किलर ड्रोन जैसे उपकरणों से लैस हैं। मगर इन कमांडो की वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग इन्हें और खतरनाक बनाएगी। सूत्रों ने बताया कि चीन के साथ इस वक्त जिस तरह के हालात चल रहे हैं। उस स्थिति में सेना के साथ-साथ वायुसेना भी खुद को फारवर्ड एरिया में और मजबूत करने में लगी हुई है।

पठानकोट हमले में गरुड़ ने किए थे आतंकी ढेर
2016 में पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हुए आतंकी हमलों में भी एयरफोर्स की गरुड़ फोर्स ने ही आतंकियों को ढेर किया था। देश के इतिहास में किसी एयरफोर्स स्टेशन के भीतर घुसकर यह सबसे बड़ा आतंकी हमला था।

एयरफोर्स ने एयरबेस में छिपे इन आतंकियों को ढेर करने की जिम्मेदारी गरुड़ कमांडो फोर्स को ही दी थी। इन कमांडो ने सभी आतंकियों को तो ढेर कर दिया था। मगर दुर्भाग्यवश इसी ऑपरेशन में गरुड़ फोर्स ने अपने सबसे पहले कमांडो हरियाणा के अंबाला शहर निवासी गुरसेवक को भी खोया था। गुरसेवक इस फोर्स का पहला कमांडो था, जो आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुआ था।

अपाचे की फारवर्ड एरिया में बढ़ाई निगरानी
सूत्रों ने बताया कि एयरफोर्स ने अपनी सबसे खतरनाक लड़ाकू हेलिकॉप्टर अपाचे की फारवर्ड एरिया में निगरानी बढ़ा दी है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के दुर्गम बॉर्डर क्षेत्रों में ये हेलिकॉप्टर पहले से ही तैनात था। अब चीन बार्डर पर मौजूदा टेंशन को देखते हुए इस लड़ाकू हेलिकॉप्टर की स्क्वाड्रन को और चौकस रहने के निर्देश दिए गए हैं। ये स्क्वाड्रन पठानकोट में तैनात है। मगर इस वक्त ये हेलिकॉप्टर एलएसी पर सरहदों की निगहबानी कर रहा है।
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