एयरफोर्स के गरुड़ कमांडो भी इसी सिद्धांत पर प्रशिक्षित किए जा रहे हैं। जिससे उनकी क्षमताओं में और इजाफा होगा और ये फोर्स और खतरनाक बनेगी। गरुड़ कमांडो इस वक्त अत्याधुनिक हथियारों, टोही उपकरणों समेत किलर ड्रोन जैसे उपकरणों से लैस हैं। मगर इन कमांडो की वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग इन्हें और खतरनाक बनाएगी। सूत्रों ने बताया कि चीन के साथ इस वक्त जिस तरह के हालात चल रहे हैं। उस स्थिति में सेना के साथ-साथ वायुसेना भी खुद को फारवर्ड एरिया में और मजबूत करने में लगी हुई है।
पठानकोट हमले में गरुड़ ने किए थे आतंकी ढेर
2016 में पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हुए आतंकी हमलों में भी एयरफोर्स की गरुड़ फोर्स ने ही आतंकियों को ढेर किया था। देश के इतिहास में किसी एयरफोर्स स्टेशन के भीतर घुसकर यह सबसे बड़ा आतंकी हमला था।
एयरफोर्स ने एयरबेस में छिपे इन आतंकियों को ढेर करने की जिम्मेदारी गरुड़ कमांडो फोर्स को ही दी थी। इन कमांडो ने सभी आतंकियों को तो ढेर कर दिया था। मगर दुर्भाग्यवश इसी ऑपरेशन में गरुड़ फोर्स ने अपने सबसे पहले कमांडो हरियाणा के अंबाला शहर निवासी गुरसेवक को भी खोया था। गुरसेवक इस फोर्स का पहला कमांडो था, जो आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुआ था।
अपाचे की फारवर्ड एरिया में बढ़ाई निगरानी
सूत्रों ने बताया कि एयरफोर्स ने अपनी सबसे खतरनाक लड़ाकू हेलिकॉप्टर अपाचे की फारवर्ड एरिया में निगरानी बढ़ा दी है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के दुर्गम बॉर्डर क्षेत्रों में ये हेलिकॉप्टर पहले से ही तैनात था। अब चीन बार्डर पर मौजूदा टेंशन को देखते हुए इस लड़ाकू हेलिकॉप्टर की स्क्वाड्रन को और चौकस रहने के निर्देश दिए गए हैं। ये स्क्वाड्रन पठानकोट में तैनात है। मगर इस वक्त ये हेलिकॉप्टर एलएसी पर सरहदों की निगहबानी कर रहा है।