भारत सरकार ने कनाडा के नागरिकों का वीजा बंद कर दिया है। इसका सबसे अधिक प्रभाव पंजाब पर पड़ने जा रहा है। पंजाब के लाखों लोग कनाडा में नागरिकता लेकर बसे हैं। हालात यह हैं कि कनाडा की नागरिकता हासिल कर चुके पंजाबी मूल के लोगों के घर और खेती अब भी पंजाब में है, जिसके जरिये वह अपनी मिट्टी से जुड़े हैं।
कनाडा की कुल आबादी लगभग 4 करोड़ है। 2021 की जनगणना में कनाडा में सिखों की आबादी 7 लाख 70 हजार रिकॉर्ड की गई थी जो कि कनाडा की कुल आबादी का लगभग 2.1 प्रतिशत के बराबर है। यह आबादी पंजाब के लोगों की है, जो कनाडा में जाकर बस चुके हैं।
अल्बर्टा में सिखों की आबादी 1 लाख है, वहीं सस्कैचवान में 10 हजार सिख रहते हैं जबकि ब्रिटिश कोलंबिया में सबसे ज्यादा 2.9 लाख सिख रहते हैं। वैंकुवर व सरीं इलाके सिख बहुसंख्यक हैं। खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या ब्रिटिश कोलंबिया में ही हुई थी। कनाडा में इस वक्त पंजाब के करीब 1.60 लाख छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। यह सब स्टडी वीजा पर कनाडा गए हैं। कनाडा को वीजा फीस, कॉलेज फीस और वहां पर रहने से दौरान जो टैक्स मिलता है, उससे काफी कमाई है। कनाडा कभी नहीं चाहेगा कि उसकी यह इनकम खत्म हो।
कनाडा पासपोर्ट होल्डर पंजाबी लोग आज भी अपने वतन व सूबे से जुड़े हैं। नवंबर में कनाडा से नागरिक पंजाब आने शुरू हो जाते हैं और पंजाब में कबड्डी कप से लेकर मेले तक करवाए जाते हैं। लिहाजा, इस बार सब फीका रहेगा। कनाडा नागरिक परम सिद्धू हर साल पंजाब में एक मुफ्त आई कैंप लगाकर सैंकड़ों लोगों की आंखों का ऑपरेशन फ्री में करवाकर कनाडा लौट जाते हैं। उनकी जमीन जायदाद आज भी मल्सियां व शाहकोट में है। कनाडा के सरीं में रहने वाले प्रिंस सन्नन का घर आज भी अर्बन इस्टेट जालंधर में है और वह नवंबर में पंजाब आने की तैयारी कर रहे थे लेकिन अब उन्हें रोक दिया गया है।
इमिग्रेशन एक्सपर्ट सुकांत का कहना है कि भारतीय छात्र कनाडा के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ते हैं और ट्यूशन फीस के रूप में अरबों डॉलर देते हैं। कनाडियन ब्यूरो ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन के अनुसार भारतीय छात्रों ने साल 2021 के दौरान कनाडाई अर्थव्यवस्था में 4.9 अरब डॉलर से अधिक का योगदान दिया। भारत और कनाडा के बीच उपजे विवाद के बाद वे लोग परेशान हैं, जिनके परिवार के बच्चे या तो वहां पढ़ रहे हैं या कोई व्यापार कर रहे हैं। इन सबके बीच हमारे लिए देश व उसकी साख पहले है, कारोबार बाद में। कनाडा नागरिकों का वीजा बंद करने से कारोबार काफी प्रभावित होगा लेकिन देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दमदार छवि की जरूरत भी है।