यात्रियों को सामान रखने के लिए ‘गठरी घर’ की सुविधा दी जाएगी। 300 यात्रियों के बैठने के लिए वातानुकूलित वेटिंग हाल और 200 व्यक्तियों के लिए फूड कोर्ट भी बनाया जाएगा। 8200 वर्ग मीटर में लैंडस्केपिंग कर बैठने की व्यवस्था की जाएगी। श्री डेरा बाबा नानक से लेकर कॉरिडोर तक सभी बुनियादी सुविधाएं दी जाएंगी।
पांच हजार श्रद्धालुओं के लिए होंगे 54 इमिग्रेशन सेंटर
निधि खरे ने बताया कि श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए प्रतिदिन पांच हजार श्रद्धालुओं को भेजा जाएगा। इसके लिए 54 इमिग्रेशन काउंटर स्थापित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं को करतारपुर साहिब जाने के लिए लाइनों में लगना होगा। जिसके लिए 1700 वर्गमीटर क्षेत्र में विशेष व्यवस्था की जाएगी। इस स्थान पर 12 कस्टम काउंटर भी बनाए जाएंगे। लैंडस्केपिंग स्थल पर जल भंडार, अर्टिकास, पंजाब के सभ्याचार को प्रदर्शित करती मूर्तियां, थियेटर और बेंच की सुविधा होगी। पहले चरण में जमीन की कीमत को छोड़कर 140 करोड़ की राशि खर्च होगी।
करतारपुर कॉरिडोर परिसर में 300 मीटर ऊंचा तिरंगा भी फहराएगा। कई किलोमीटर दूर से दिखाई देने वाले इस तिरंगे के लिए विशेष राष्ट्रीय स्मारक का भी निर्माण किया जाएगा। इससे पहले अटारी सीमा पर 360 फुट ऊंचा तिरंगा मार्च 2017 में लगाया गया था। बॉर्डर पर अब दो सीमावर्ती स्थानों पर झंडा लहराएगा। दूसरे चरण में 30 मीटर ऊंचा एक वाच टावर, दर्शक दीर्घा और एक रेस्टोरेंट का निर्माण किया जाएगा।
कॉरिडोर परिसर में पांच बिस्तर का अस्पताल और 300 श्रद्धालुओं के लिए रिहायश का भी प्रबंध किया जाना है। एक पुलिस स्टेशन, फायर स्टेशन और हजारों वाहनों की पार्किंग के लिए विशेष व्यवस्था होगी। भारतीय अधिकारियों ने पांच मिनट का वीडियो दिखाकर करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण के बारे में जानकारी दी। पाकिस्तान शिष्टमंडल ने भी अपनी साइड में बन रहे कॉरिडोर की चार मिनट की वीडियो दिखाई।