कोरोना संक्रमण की प्राथमिक जांच के लिए स्वदेशी रैपिड टेस्टिंग किट की खोज का कार्य लगभग पूरा हो गया है। गंध पर आधारित इस किट के क्लीनिकल ट्रायल की सफलता के बाद अब मास टेस्टिंग की तैयारी की जा रही है। पांच टैबलेट वाली इस किट को नेशनल एग्री-फूड बॉयो टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (नाबी) में तैयार किया जा रहा है। इसमें पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों की टीम भी सहयोग कर रही है।
हालांकि केंद्र सरकार की मंजूरी व औद्योगिक उत्पादन के बाद यह आम लोगों तक पहुंच सकेगी। इसमें करीब 3 से 4 महीने का समय लगने की संभावना है। मोहाली के नाबी में गंध पर आधारित कोविड-19 रैपिड टेस्टिंग किट तैयार की जा रही है। यह प्रोजेक्ट नाबी के वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र विश्नोई का है। इसमें उनकी टेक्निकल टीम के अलावा पीजीआई के डॉक्टर सहयोग कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट का रिसर्च वर्क लगभग पूरा हो चुका है।
इस रैपिड टेस्टिंग किट में पांच टैबलेट होंगी, जिन्हें रसोई व घर में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले मसालों व खाद्य पदार्थों से तैयार किया गया है। शुरुआत में इस किट में इस्तेमाल की गई चीजों को उनके मूल रूप में लिया गया था। इसके बाद कुछ खामियां व सवाल सामने आए थे, जिस पर रिसर्च के बाद लैब में इन चीजों के शुद्ध वर्जन तैयार किए गए और उन्हें पांच अलग-अलग टैबलेट की शक्ल दी गई।