लद्दाख की गलवां घाटी में सीमा की रक्षा करते हुए सुनाम के गांव तोलावाल निवासी गुरविंदर सिंह ने अपनी शहादत दी। सेना ने बुधवार को सुबह साढे़ छह बजे गुरविंदर के शहीद होने की सूचना दी। लेकिन शाम तक शहीद गुरविंदर सिंह की शहादत के बारे में मां चरणजीत कौर को बताने की हिम्मत कोई नहीं कर सका।
केवल यही बताया गया कि गुरविंदर चीनी सेना के हमले में गंभीर जख्मी हो गया है और जल्द ठीक होकर लौटेगा। लेकिन अपने घर में लोगों का आना-जाना देख मां चरणजीत कौर बार-बार रोती रहीं। मां के दर्द को समझते हुए घर के पुरुष भी इस गमगीन माहौल में जमीन पर बैठे नहीं बल्कि आसपास खडे़ रहे और लोग उन्हें ढांढस बंधाने के लिए आते रहे।
गुरविंदर के पिता लाभ सिंह ने इतना ही कहा कि एक मां के दर्द को देखना उनके बस में नहीं है। शायद इसी कारण ही शहीद गुरविंदर की मां को शहादत के बारे में बताने का हौसला नहीं हो रहा है। गुरुवार शाम तक शहीद गुरविंदर का पार्थिव शरीर गांव पहुंचेगा।
दो भाई व एक बहन में सबसे छोटे गुरविंदर सिंह की करीब तीन माह पहले ही सगाई हुई थी और नवंबर में शादी होनी थी। सेना में भर्ती हुए अभी दो साल ही हुए थे। पिता लाभ सिंह ने बताया कि नजदीकी गांव उभावाल में उसकी सगाई की गई थी और नवंबर में गुरविंदर की ड्यूटी से लौटने पर धूमधाम से शादी करनी थी। लेकिन सभी अरमान धरे के धरे रह गए हैं। सुनाम के नायब तहसीलदार अमित कुमार शहीद के घर पहुंचे और परिवार को ढांढसा बंधाया।