लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद विधानसभा चुनाव में हरियाणा सरकार एक कदम भी पीछे नहीं रहना चाहती। अपने निर्धारित वोट बैंक के अलावा पार्टी ने पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को रिझाने के लिए ट्रंप कार्ड खेल दिया है।
रविवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने श्रेणी-1 और श्रेणी-2 के पदों पर सीधी भर्ती के लिए पिछड़ा वर्ग, विशेष पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण के कोटे में वृद्धि करने की घोषणा की है।
मंत्रिमंडल की बैठक में पिछड़ा वर्ग के लिए मौजूदा 10 प्रतिशत के आरक्षण के कोटे को बढ़ाकर पिछड़ा वर्ग-ए के लिए 10 प्रतिशत तथा पिछड़ा वर्ग-बी के लिए पांच प्रतिशत करने का फैसला लिया गया है। पहले आरक्षण के तहत बी वालों को अधिक लाभ मिल जाता था, जबकि ए वर्ग वंचित रह जाता था।
इसी प्रकार विशेष और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए मौजूदा आरक्षण कोटे को चार प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत किया गया है।
अन्य वर्गों के लिए आरक्षण का कोटा मौजूदा प्रावधानों के अनुरूप ही रहेगा। मौजूदा सरकार के आंकड़े ये हवाला दे रहे हैं कि चौटाला सरकार के समय में पिछड़ा वर्गों तथा अनुसूचित जाति वर्गों के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत 55.96 करोड़ रुपये का बजट का प्रावधान था। जबकि अब इन वर्गों के लिए 366.36 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान है।