पंजाब कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आयकर विभाग की ओर से उनके बेटे रणइंदर सिंह के खिलाफ लुधियाना की अदालत में दी गई शिकायत को राजनीतिक द्वेष की मिसाल बताया है। हालांकि कैप्टन ने कहा है कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने पर रणइंदर पर लगे आरोप निराधार साबित होंगे।
कैप्टन ने कहा कि यह मामला पहली बार नहीं उठाया गया है। उनके अमृतसर लोकसभा चुनाव जीतने के बाद से यह हो रहा है। हर बार इन्होंने मुंह की खाई है। इस बार भी इन्हें हार का सामना करना पड़ेगा। साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने बाड़मेर और सुब्रमण्यम स्वामी ने यह मामला उठाया था।
लगातार असफल रहने के बाद भी इनकी कोशिशें जारी हैं। कैप्टन ने कहा है कि शिकायत की कॉपी मीडिया में भी उसी समय बांटी गई, जब यह अदालत में दायर की गई। इस शिकायत का न्यायिक प्रक्रिया में कोई आधार नहीं है। उन्हें बदनाम करने की कोशिश के तहत अदालत का फैसला आने से पहले मीडिया का इस्तेमाल किया गया। कैप्टन ने कहा कि उन्हें लगता था कि अरुण जेटली अपनी चुनावी हार भूल चुके हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।
हर बार उन्हें साल 2014 में अहम को पहुंची ठेस याद आ जाती है। जिस कारण वह बार-बार उनके किसी पारिवारिक सदस्य को आयकर विभाग नोटिस भेज देते हैं। वित्त मंत्री सिर्फ उन्हें ही निशाना नहीं बना रहे, बल्कि यह सूची बहुत लंबी है। इसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, पी चिदंबरम व उनके बेटे के अलावा वीरभद्र सिंह भी हैं।
कैप्टन ने कहा कि विधानसभा चुनाव को एक साल का समय ही शेष रह गया है। ऐसे में शिअद-भाजपा ने यह रास्ता अपनाया है। जिसके तहत केंद्र सरकार उनके परिवार पर झूठे आरोप लगाने की कोशिश कर रही है। पर जैसे हर बार यह आरोप मुंह के बल गिरे हैं, इस बार भी ऐसा ही होगा।