देश में कुछ वर्गों के लोग अभी तक इनकम टैक्स के दायरे से बाहर हैं, लेकिन आयकर विभाग ने इन पर नजर रखनी शुरू कर दी है। आयकर विभाग ने देशभर से ऐसे इनविजिबल इंटरप्रेन्योर का आंकड़ा एकत्र किया है, जो कमाई के मामले में एक मल्टीनेशल कंपनी के मैनेजर या कर्मचारी से कहीं अधिक कमाते हैं, लेकिन इनकम टैक्स नहीं चुकाते हैं।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार देश में ऐसे टैक्स न चुकाने वाले छोटे इंटरप्रेन्योर की संख्या करीब 45 लाख है। वहीं, अगर केवल ट्राइसिटी की बात करें तो ऐसे कारोबारियों की संख्या करीब पौने दो लाख है।
इन इनविजिबल इंटरप्रेन्योर में सब्जीवाले, रेहड़ी वाले और अपना व्यवसाय करने वाले लोग शामिल हैं, जिनका कहीं कोई रजिस्ट्रेशन नहीं होता और वह प्रतिदिन के हिसाब से अच्छी कमाई करते हैं। ऐसे ही लोगों पर अब आयकर विभाग की नजर है।
अधिक से अधिक आयकर इकट्ठा करने की कवायद
देश की आबादी की तुलना में केवल 3 से 4 प्रतिशत लोग ही टैक्स चुकाते हैं। ऐसे में अधिक से अधिक लोग टैक्स चुकाएं, इसके लिए आयकर विभाग ने हाल ही में नॉन फाइलर मॉनिटरिंग सिस्टम लॉन्च किया गया है। इसके तहत विभाग बैंकों, रजिस्ट्री विभाग, ज्वेलर्स, कार विक्रेताओं, सरकारी कार्यालयों आदि के माध्यम से इनविजिबल इंटरप्रेन्योर को पकड़ा जाएगा।
टैक्स न चुकाने वाले ऐसे लोग जैसे ही बैंक में बड़ी रकम जमा करेंगे, वैसे ही वह आयकर विभाग की नजर में आ जाएंगे। वहीं, अगर कोई कैश पर कार खरीदता है, ज्वेलरी खरीदता है या 50 हजार रुपये से अधिक का फिक्सड डिपाजिट (एफडी) करवाता है तो भी वह आयकर विभाग की नजर में आ जाएगा।
वहीं, अगर कोई 30 लाख रुपये से अधिक की प्रापर्टी खरीदता है तो भी वह आयकर विभाग से बच नहीं सकता। इनविजिबल इंटरप्रेन्योर के द्वारा ऐसी कोई भी बड़ी ट्रांजेक्शन या सेविंग के माध्यम से ही विभाग उन तक पहुंचेगा।
इसके बाद विभाग की ओर से उसे नोटिस भेजा जाएगा और पूछा जाएगा कि उसने अपनी आय पर अब तक टैक्स क्यों नहीं चुकाया। विभाग के इस कदम के बाद निश्चित तौर पर इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या बढ़ेगी।
कोचिंग सेंटर्स और स्कूल संचालकों पर भी नजर
ट्राइसिटी में तेजी से फैल रहे कोचिंग सेंटर संचालकों पर भी विभाग की नजर है। इसके अलावा कई ऐसे संचालक भी विभाग की नजर से नहीं बच सकते जो घर बैठे-बैठे ही कोचिंग देते हैं और अच्छी खासी कमाई करते हैं। लेकिन, अपनी आय को विभाग से छिपाते हैं और इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं करते।
ऐसे कोचिंग संचालकों पर भी विभाग अब से नजर रखेगा। आयकर विभाग ट्राइसिटी के स्कूलों में एक अभियान चलाएगा। इसके तहत स्कूली बच्चों को टैक्स चुकाने पर देश के निर्माण में इसकी अहमियत के बारे में बताया जाएगा।
साथ ही उन्हें अपने घर में परिजनों या कमाने वाले सदस्यों को इसके बारे में बताने को प्रेरित किया जाएगा। विभाग की ओर से इससे पहले भी यूटी के कुछ स्कूलों में कार्यक्रम चलाए गए हैं।