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Chandigarh News: सेक्टर-48 में इलाज के नाम पर यहां सिर्फ बेड, जांच दवा के लिए जाना पड़ता है जीएमसीएच

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चंडीगढ़। यहां इलाज के नाम पर हमें सिर्फ बेड मिला है। एक्सरे, दवा, खून जांच और यहां तक कि खाने-पीने की चीजों के लिए भी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 से लेकर बाजारों तक के चक्कर काटने पड़ते हैं। दिन ही नहीं रात में भी अपनी जरूरतों के लिए अकेले बाहर निकलना पड़ता है। यह दर्द है सेक्टर-48 में भर्ती मरीजों का।
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दो साल पहले वर्ष 2022 में सेक्टर-48 के अस्पताल में ओपीडी और मरीजों को भर्ती करने की शुरुआत हुई थी। तब यहां जीएमसीएच-32 के चार विभागों के मरीजों को शिफ्ट किया गया था। इन विभागों में त्वचा रोग, ओंकोलॉजी, पल्मोनरी और मनोचिकित्सा विभाग शामिल हैं, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी इन चारों विभागों के मरीजों को सेक्टर-48 से जीएमसीएच-32 के चक्कर लगवाए जा रहे हैं। अब तक यहां मरीजों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। यहां भर्ती मरीज दोनों अस्पतालों के बीच पिस रहे हैं, जिससे उनकी सेहत ठीक होने के बजाय और बिगड़ रही है।
बता दें कि सेक्टर-48 में हॉस्पिटल को बनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य 45, 46, 47, 49, 50, 51 जगतपुरा, फैदां, रामदरबार और मोहाली की जनता को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराना था लेकिन सुविधा शुरू होने के बाद भी इस क्षेत्र की जनता के हाथ निराशा ही लगी है। अब भी चंडीगढ़ के उस क्षेत्र की बड़ी आबादी को इलाज कराने के लिए अपने घर से कई किमी दूर जाना पड़ रहा है। उधर, अस्पताल प्रशासन का कहना कि मरीजों की परेशानी को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जाए रहे हैं। जल्द ही बदलाव नजर आएगा।
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दोपहर 12 बजे के बाद बंद हो जाता है सबकुछ
सेक्टर-48 के अस्पताल में ओपीडी और भर्ती मरीजों के लिए सुबह 10 से 12 बजे तक एक्स-रे की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। खून जांच के लिए सुबह 11 बजे तक ही नमूना लिया जाता है। ईसीजी की सुविधा भी 24 घंटे उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीज की मौत होने पर उसका सत्यापन करने के लिए भी जीएमसीएस-32 से कर्मचारी बुलाना पड़ता है। चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग सेक्टर-48 के अस्पताल को लेकर बड़े-बड़े दावे तो कर रहा है लेकिन धरातल पर स्थिति बेहद खराब है। पूर्व स्वास्थ्य सचिव ने सेक्टर 48 अस्पताल में दवा की दुकान शुरू करने की घोषणा की थी लेकिन उनके जाने के बाद योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
मरीजों का दर्द... कैटीन न दवा की दुकान
पंचकूला निवासी सुरेंद्र कुमार को त्वचा संबंधी परेशानी होने पर पत्नी ने उन्हें सेक्टर-48 के अस्पताल में भर्ती कराया। अब दोपहर 12 बजे के बाद उन्हें जांच, दवा व अन्य चीजों के लिए जीएमसीएच-32 और बाजार के चक्कर काटने पड़ते हैं। उनका कहना है कि इलाज के नाम पर बस बेड दे दिया गया है। दवा, एक्स-रे, खून जांच सब के लिए बाहर जाना पड़ता है। ये हाल सिर्फ सुरेंद्र का ही नहीं है बल्कि अस्पताल में भर्ती लगभग 50 से 60 मरीजों और उनके तीमारदारों का है। समस्या के समाधान में जीएमसीएच-32 प्रशासन भी नाकाम साबित हो रहा है, क्योंकि उसके पास न तो अतिरिक्त डॉक्टर उपलब्ध हैं न हीं अन्य कर्मचारी। सेक्टर- 48 के अस्पताल में न तो दवा की दुकान है और न ही कैंटीन।
पंजाब निवासी बलजिंदर कौर के फेफड़े में पानी भरने पर उन्हें जीएमसीएच-32 से सेक्टर-48 के अस्पताल में भर्ती कराया गया। भर्ती होने के 24 घंटे के बाद उनकी स्थिति अचानक बिगड़ गई। इलाज के दौरान इमरजेंसी में डॉक्टरों ने तत्काल एक्सरे करने के लिए कहा। रात के 8 बजे बलजिंदर का एक्सरे करने के लिए परिजनों को उन्हें जीएमसीएच-32 ले जाना पड़ा। बलजिंदर के परिजनों का कहना है कि अगर जांच के लिए और फॉलोअप के लिए जीएमसीएच-32 ही भेजना था तो मरीज को सेक्टर-48 के अस्पताल में क्यों भेजा। ऐसा करके सिर्फ मरीजों को परेशान किया जा रहा है।
अब तक उधारी के डॉक्टर और स्टाफ
सेक्टर-48 के अस्पताल को संचालित करने के लिए 74 डॉक्टर, 161 पैरा मेडिकल स्टाफ, 10 प्रशासनिक स्टाफ, एक ज्वाइंट कंट्रोलर, एक डिप्टी कंट्रोलर और एक सेक्शन अफसर की नियुक्ति की जानी थी लेकिन अब तक तैनाती की प्रक्रिया लंबित है। ऐसे में जीएमसीएच-32 अस्पताल प्रशासन को अपने ही डॉक्टर और स्टाफ वहां तैनात करने पड़ रहे हैं, जिससे वहां की भी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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