स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार कटाई कार्य में इस्तेमाल हुई रस्सियां और उपकरण वहीं छोड़े गए जबकि ट्रॉली में लकड़ी के मोटे लट्ठ भी लादे गए। लोगों से पूछताछ पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। पंजाब रोडवेज होशियारपुर के जनरल मैनेजर जसवीर सिंह ने फोन नहीं उठाया जबकि संबंधित क्लर्क सुरिंदर सिंह ने यह कहते हुए मामले से पल्ला झाड़ा कि पड़ोसियों के घरों में पत्ते गिरने के कारण टहनियां काटी गई हैं। उनका दावा था कि कोई पेड़ नहीं काटा गया, केवल मोटी टहनियां छांटी गई हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि संभव है कि ऊपर से अनुमति मिली हो।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई हो
लेबर पार्टी के प्रधान और पर्यावरण कार्यकर्ता जय गोपाल धीमान ने कहा कि यह हाईकोर्ट के आदेश की सीधी नाफरमानी है और सरकारी वर्कशॉप में पेड़ काटने की यह नापाक साजिश है। उन्होंने हाई लेवल जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। धीमान ने जिला प्रशासन से भी तुरंत कार्रवाई की अपील की, ताकि सरकारी संपत्ति और पर्यावरण की रक्षा सुनिश्चित हो सके। इस मामले ने प्रशासनिक उदासीनता और पर्यावरण संरक्षण की अनदेखी को उजागर कर दिया है, वहीं जनता में भी गहरी नाराजगी पैदा की है।