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Chandigarh News: चंडीगढ़ में पंजाब के 238, हरियाणा के सिर्फ 7 कानून

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ में पंजाब के 238 और हरियाणा के सिर्फ सात कानून लागू हैं। यानी पड़ोसी राज्यों के कानूनों में पंजाब की हिस्सेदारी हरियाणा से करीब 34 गुना ज्यादा है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के लोकसभा में पूछे सवाल पर केंद्र सरकार ने यह जानकारी दी। केंद्र ने साथ ही स्पष्ट किया कि दूसरे राज्यों के कानून चंडीगढ़ में लागू करने के लिए किसी अलग समान नीति या फ्रेमवर्क की जरूरत नहीं है। हर कानून को उसकी स्थानीय जरूरत, उद्देश्य और कानूनी प्रभाव के आधार पर अलग-अलग देखा जाता है।
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गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से स्थानीय आवश्यकता के आधार पर किसी कानून को लागू करने का प्रस्ताव शुरू किया जाता है। इसके बाद केंद्र सरकार संबंधित कानून के उद्देश्य और उसके प्रभाव को देखते हुए निर्णय लेती है। केंद्र ने बताया कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 87 केंद्र सरकार को किसी राज्य में लागू कानून को अधिसूचना के जरिये चंडीगढ़ में लागू करने की शक्ति देती है। सरकार ने इसी प्रावधान के चलते अलग नीति बनाने की जरूरत से इनकार किया है।
मनीष तिवारी ने पूछा- आधार क्या है?
मनीष तिवारी ने केवल कानूनों की संख्या नहीं पूछी थी। उन्होंने यह भी पूछा था कि पंजाब और हरियाणा के कानून चंडीगढ़ में लागू करने के लिए कौन-से कानूनी मानदंड अपनाए जाते हैं। पिछले पांच वर्षों में लागू कानूनों और उनके कारणों तथा भविष्य में इन्हें लागू, संशोधित या खत्म करने के लिए किसी समान नीति की योजना के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी। चंडीगढ़ में लागू पंजाब के कानूनों में कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट-1952, पंजाब म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, पंजाब पुलिस एक्ट, पंजाब राइट टू सर्विस एक्ट, पंजाब राइट टू बिजनेस एक्ट और पंजाब अबादी देह (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) एक्ट शामिल हैं। ये कानून जमीन-संपत्ति, नगर व्यवस्था, पुलिस, नागरिक सेवाओं और कारोबार से जुड़े हैं।
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पांच साल में भी लागू हुए कई कानून
केंद्र के अनुसार हाल के वर्षों में पंजाब के हुक्का बार संबंधी संशोधन और शॉप्स एंड कमर्शियल एस्टेब्लिशमेंट्स संशोधन कानून तथा स्टांप कानूनों में संशोधन चंडीगढ़ में लागू किए गए। हरियाणा के एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट, ओबीसी आरक्षण कानून और फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज एक्ट भी लागू किए गए हैं। मानव तस्करी रोकने से संबंधित कानून भी इस अवधि में लागू हुआ। पंजाब राइट टू बिजनेस एक्ट-2020 का उद्देश्य कारोबार के लिए समयबद्ध मंजूरी, कम निरीक्षण और एमएसएमई पर नियामकीय बोझ घटाना बताया गया है। चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश होने के बावजूद पंजाब और हरियाणा के कानूनों की मौजूदगी में बड़ा अंतर है। 238 बनाम सात का यह आंकड़ा शहर की कानूनी और प्रशासनिक विरासत के साथ-साथ भविष्य में चंडीगढ़ की पहचान और अधिकारों को लेकर होने वाली राजनीतिक बहस को भी नया आधार दे सकता है।
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