इमरान ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को उन्होंने फोन कर कहा था कि दोनों देश तभी तरक्की कर सकते हैं, जब शांति और अमन चैन रहे। लेकिन हमारे बीच एक बहुत ही गंभीर मसला कश्मीर है। इस मामले को हमें सुलझा लेना चाहिए। लेकिन बड़े अफसोस की बात है कि पाकिस्तान की हुकूमत तो तैयार है लेकिन दूसरी तरफ से कोई ठोस उत्तर नहीं आया।
इमरान खान ने कहा कि फ्रांस और जर्मनी के बीच कितनी खटास थी, लेकिन आज दोनों देशों में कितना प्यार है। जिस तरह दोनों के बॉर्डर खुले हुए हैं, हम भी चाहते हैं कि उसी तरह भारत-पाक के बीच बॉर्डर खुले। लेकिन जब कश्मीर में लोगों को घरों में बंद कर जुल्म किया जा रहा हो तो प्यार और समझौते वाली बात कहां रह जाती है। यह कोई व्यापार का या आर्थिक मामला नहीं है। हिंदुस्तान की जनता के ऊपर मानवाधिकार का मामला है।
कश्मीर के लोग इंसाफ चाहते हैं और कश्मीर का मामला वहां के लोगों पर छोड़ देना चाहिए। इससे खुशहाली ही आएगी और ऐसे में दोनों देशों के बीच बॉर्डर खुल जाएंगे। इमरान खान ने कहा कि नेता तमाम समुदाय के लोगों को एकत्रित करता है उसका काम उनको बांटना नहीं होता। नेल्सन मंडेला को देखना चाहिए जिसने रंगभेद को खत्म करने के लिए 25 साल जेल में बिता दिए। जब तक दुनिया रहेगी, अब तक नेल्सन मंडेला का नाम भी चलता रहेगा।
पीएम मोदी ने बर्लिन की दीवार गिराने का भी किया जिक्र
यह इत्तेफाक ही है कि पाक प्रधानमंत्री इमरान खान के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने एक संबोधन में जर्मनी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज 9 नवंबर है। आज के दिन बर्लिन की दीवार गिरी थी। दो विपरीत धाराओं ने एकजुट होकर नया संकल्प लिया था। आज 9 नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर की शुरुआत हुई है। इसमें भारत और पाकिस्तान का भी सहयोग रहा है।