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सरकारी अस्पताल में डिलीवरी करानी है तो पढ़ें ये फरमान

Fri, 29 May 2015 03:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
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गर्भवती महिला की सामान्य डिलीवरी के बाद जच्चा-बच्चा को 48 घंटे और सिजेरियन केसों में सात दिन तक अस्पताल में रखना जरूरी है।
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हरियाणा के मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. राकेश गुप्ता ने वीरवार को जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए की बैठक में यह जानकारी दी। डा. गुप्ता ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान, लिंगानुपात, पीएनडीटी एक्ट की पालना और जिलों में बेटियों के लिए बनाए जाने वाले शौचालयों सहित विभिन्न विषयों पर बातचीत की।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि हरियाणा में संस्थानिक डिलीवरी का प्रतिशत 88.6 है, जिसमें मेवात में 40.5 फीसदी और पलवल में 66.7 फीसदी डिलीवरी ही अस्पतालों में होती हैं। उन्होंने बताया कि डिलीवरी के बाद जच्चा-बच्चा को अस्पताल में 48 घंटे रखने के मामले 77.7 फीसदी ही हैं, जबकि सामान्य डिलीवरी में 48 घंटे और सिजेरियन से डिलीवरी के मामले में सात दिन तक जच्चा-बच्चा को अस्पताल में रखा जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि सिजेरियन मामलों में बच्चे के जन्म के पहले दो दिन के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत के मामले अधिक सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की रोकथाम को प्राथमिकता दी जाना चाहिए और जिन महिलाओं ने आयरन की गोलियां नहीं ली हों, उनमें पूरी देखरेख के साथ इंजेक्शन के जरिए हीमोग्लोबिन का स्तर सुधारा जाना चाहिए।

वीडियो कांफ्रेंसिंग में गुड़गांव की सिविल सर्जन डा. पुष्पा बिश्नोई ने बताया कि गुड़गांव में जनवरी माह से लेकर अब तक लगभग 43 अल्ट्रासाउंड केन्द्रों पर पीएनडीटी निरीक्षण समिति द्वारा छापेमारी की गई है, जिसमें से 8 अल्ट्रासाउंड केन्द्र संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और 2 अल्ट्रासाउंड केन्द्रों को सील किया गया है।
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उन्होंने बताया कि जिला में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कैंप लगाए जा रहे हैं।
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