सरकारी बसों, टैक्सियों और सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता व्यवस्था करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में सही तरीके से पालन नहीं हो पा रहा है। इसी मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिका पर अदालत ने और प्रयास करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2012 में एक आदेश में कहा था कि बस स्टॉप, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, पार्कों, शॉपिंग मॉल, सिनेमाघरों, धार्मिक स्थलों के अलावा सरकारी बसों और टैक्सियों में सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती हो। इसी मामले में एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि पंजाब और हरियाणा में सुप्रीमकोर्ट के इन दिशा-निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा। इसी याचिका पर हाईकोर्ट ने जवाब तलब किया था।
पंजाब और हरियाणा ने कहा था कि प्रत्येक जगह महिला पुलिस की तैनाती संभव नहीं है, लेकिन ऐसे सार्वजनिक जगहों पर समय-समय पर चेकिंग की व्यवस्था बनाई गई है। इस पर याची ने बसों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था का सुझाव दिया था।
पूछा, कितनी बसों में लगे कैमरे:
एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने ही शुक्रवार को पंजाब और हरियाणा से जुड़ी जानकारी तलब की है। पूछा है कि अब तक कितनी स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे लग चुके हैं। जस्टिस राजीव भल्ला ने दोनों राज्यों में स्कूल बसों के सीसीटीवी कैमरे लगा कर बसों को ई-सर्विलांस में लाया जाए, ताकि स्कूली छात्रों व छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित बनाई जा सके।