हरियाणा के खेल मंत्री अनिल विज ने कहा है कि प्रदेश में खेल कोटे के तहत नौकरी पाने वाले खिलाड़ियों को अब नौकरी मिलने के बाद छह साल तक प्रदेश के लिए खेलना अनिवार्य होगा।
शनिवार को ट्विटर के जरिए विज ने संकेत दिए कि इस नीति पर सरकारी स्तर से विचार किया जा रहा है। विज के इस ट्वीट से उन खिलाड़ियों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने खेल कोटे से सरकारी विभागों में नौकरी हासिल करने के बाद खेल से मुंह मोड़ लिया है।
यह मुद्दा मुक्केबाज विजेंदर सिंह प्रकरण के कारण उठा है। विजेंदर को अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने पर हरियाणा सरकार ने नकद पुरस्कार ही नहीं, पुलिस में डीएसपी के ओहदे पर नौकरी भी दी, लेकिन विजेंदर सिंह ने प्रदेश और देश से खेलने की बजाए एक विदेशी कंपनी से पेशेवर मुक्केबाज के तौर पर करार किया है।
इस प्रकरण में विशेष बात यह भी रही कि विजेंदर ने विदेशी कंपनी से करार की जानकारी न तो हरियाणा पुलिस को दी और न ही इसके लिए अनुमति ली है।
अनिल विज ने ट्वीट में लिखा है कि नौकरी मिलने के बाद खिलाड़ियों के लिए कम से कम छह साल जरूर खेलना होगा। इसे खेल कोटे से नौकरी के लिए अनिवार्य शर्त तय किया जाएगा।
सरकार जल्द ही खेल कोटे के तहत सरकारी नौकरी पाने वाले खिलाड़ियों के लिए नियमों में बदलाव करने जा रही है। अब नौकरी के बाद खिलाड़ियों को अगले छह साल तक खेल के मैदान में भी दिखना होगा।
- अनिल विज, खेल मंत्री, हरियाणा