चंडीगढ़। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के भवन में ओपीडी सेवा शुरू करने की योजना प्रशासन की अनदेखी की शिकार हो गई है। पूर्व स्वास्थ्य सचिव से अनुमति मिलने के बाद योजना की फाइल महीनों से वित्त विभाग में अटकी हुई है। इससे आईएमए के डॉक्टरों में निराशा है। उनका कहना है कि मंदिरों और गुरुद्वारों में जो सेवा संचालित हो रही है, उसी तर्ज पर आईएमए भवन में ओपीडी संचालित करने की योजना बनाई गई है। इसे नजरअंदाज कर जरूरतमंद मरीजों के हित को दरकिनार किया जा रहा है।
आईएमए के अनुसार पीजीआई, जीएमसीएच 32 और अन्य अस्पतालों से सेवानिवृत्त हो चुके विशेषज्ञों के साथ मिलकर यह योजना बनाई गई थी। इसमें यह निर्णय लिया गया था कि वे आईएमए में अपनी सेवाएं देंगे। क्योंकि वे अन्य संस्थाओं के साथ जुड़कर ऐसा कर रहे हैं। उनकी सहमति से कार्य योजना तैयार कर स्वास्थ्य सचिव को सौंपी गई थी। जिसे एक साल पहले ही अनुमति मिल चुकी है। उसमें सरकार की ओर से तय किए गए शुल्क ही लागू होंगे। उसके बाद वह फाइल वित्त विभाग में लंबित पड़ी है। आईएमए के एक पदाधिकारी ने बताया कि महज एक हस्ताक्षर के लिए महीनों से इंतजार किया जा रहा है, जबकि ये सेवा जनता के लिए है।