केवल अरुणाचल प्रदेश में बिक्री के लिए... के नाम पर शराब के तस्कर सोना कूट रहे हैं। कागजों में पंजाब की डिस्टलरी द्वारा शराब को केवल अरुणाचल में बेचने के लिए तैयार किया जाता है लेकिन यह शराब उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश में बेची जा रही है। इससे हर साल सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। हैरानी यह है कि आज तक पुलिस की जांच इन डिस्टलरी तक नहीं पहुंच पाई है, पुलिस की जांच का रास्ते में ही दम फूलने लगता है क्योंकि सारा कारोबार नेताओं की शह पर चलाया जा रहा है।
यह है खेल..
अरुणाचल प्रदेश में ठेकेदारों की तरफ से पंजाब में मांग भेजी जाती है कि उनको शराब की जरूरत है। यहां से बोतलें पेटियों में बंद कर डिस्टलरी की तरफ से निकाली जाती हैं लेकिन ज्यादातर शराब रास्ते में ही तस्करों द्वारा खपा दी जाती है। अरुणाचल प्रदेश काफी दूर है और रास्ते में शराब आसानी से खप जाती है। अधिकारी इस बात की तहकीकात भी नहीं करते कि क्या वाकई में अरुणाचल में शराब की खपत उतनी हो रही है, जितनी पंजाब से जा रही है। अगर इसकी जड़ें खोदी गई तो पंजाब, यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान में काफी बड़ा धमाका होगा।
कई मामले सामने आ चुके हैं
मामला नंबर एक...राजस्थान के हनुमानगढ़ में 1.25 करोड़ की अवैध शराब की खेप बरामद की गई। शराब पंजाब में तैयार हुई थी और उसके लेबल पर लिखा था सेल इन अरुणाचल प्रदेश ओनली। बोतलों पर बैच नंबर भी नहीं था। राजस्थान पुलिस के लंबे हाथ उस डिस्टलरी तक नहीं पहुंच पाए, जहां से यह शराब तैयार कर सप्लाई की गई थी। नेताओं ने मामले को अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर दबा दिया।
मामला नंबर दो... उत्तराखंड के पौड़ी जिले के सतपुली में सितंबर 2019 में पुलिस ने पंजाब नंबर के एक ट्रक से 420 पेटी शराब जब्त की। चालक पुलिस को देख वाहन छोड़कर फरार हो गया। उसमें पंजाब में निर्मित फॉर सेल इन अरुणाचल प्रदेश अंकित 420 पेटी पार्टी स्पेशल ब्रांड की शराब मिली। जांच फिर पंजाब की डिस्टलरी तक नहीं पहुंच पाई क्योंकि नेताओं व अधिकारियों ने जांच को ठप कर दिया।
मामला नंबर तीन... 24 अगस्त 2019 में उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की अपराध शाखा की टीम और थाना सिरौली पुलिस ने पंजाब से बिहार ले जा रही शराब की 1650 पेटियां बरामद की। पुलिस ने 1650 पेटी से शराब के 79 हजार 200 क्वार्टर बरामद किए। इसकी अनुमानित कीमत करीब चार करोड़ रुपये बताई गई थी। यह शराब अरुणाचल प्रदेश में बिक्री के लिए ले जाई जा रही थी। यूपी की पुलिस का रास्ता किसने रोका, यह चर्चा का विषय रहा। एक पूर्व शक्तिशाली मंत्री ने दिल्ली तक जुगाड़ लगाकर यूपी की भाजपा सरकार का रास्ता रोक लिया।
मामला नंबर चार... सितंबर 2019 में यूपी के बाराबंकी के नवाबगंज रजबाहे में प्लास्टिक की बोतलों में भरी शराब बहती दिखी। संयुक्त अभियान में करीब 600 बोतलें बरामद की गईं। यह शराब कहां से नहर में आई। आशंका जताई गई कि पंजाब का कोई तस्कर पंजाब मेड व केवल अरुणाचल प्रदेश में बिक्री के लिए तैयार अधिक तीव्रता वाली क्रेजी रोमियों ब्रांड की यह शराब लाया है। पुलिस की धरपकड़ के चलते उसने इसे नहर में फेंक दिया है। एफआईआर यूपी में दर्ज हुई, यूपी पुलिस पंजाब की सीमा तक पहुंची लेकिन उनके कदम आगे नहीं बढ़ पाए।
मामला नंबर पांच...एटा (यूपी) में जनवरी में पंजाब के फिरोजपुर के रहने वाले विकर सिंह को 650 पेटी शराब के साथ गिरफ्तार किया गया। यूपी पुलिस ने विकर सिंह से जो शराब बरामद की, वह अरुणाचल प्रदेश में बिक्री के लिए थी लेकिन यूपी में अवैध रूप से बिकने जा रही थी। यूपी पुलिस की जांच ठंडे बस्ते में पड़ गई। शराब किसने तैयार की थी, आज तक यूपी पुलिस कुछ पता नहीं लगा पाई।