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घर से किया बेघर, महिला ने सबके सामने कर डाला ये काम

Mon, 17 Apr 2017 11:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बहादुरगढ़(हरियाणा)
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मकान तोड़ने के विरोध में काटी नस - फोटो : अमर उजाला
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प्रशासन का पीला पंजा जब लोगों के आशियाने पर चला, तो लोगों ने जमकर हंगामा किया इस बीच एक महिला ने सब लोगों के सामने ऐसा काम कर डाला जिससे पुलिस भी सख्ते में है। मामला हरियाणा के बहादुरगढ़ का है।मेट्रो अधिकारियों और कर्मचारियों को घर देने के लिए हुडा विभाग ने सेक्टर-9 में करीब 30 साल से बसी संत रविदास अमर कालोनी को उजाड़ दिया है। वहां बने मकानों को तोड़ा गया। इस दौरान विरोध करने वाली कई महिलाओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।  दोपहर बाद जब एक महिला वहां पहुंची। 
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संत रविदास अमर कालोनी में पिछले 30 वर्षों से बने दर्जनभर घरों को जेसीबी और पुलिस की सहायता से तोड़ दिया गया। मेट्रो कर्मचारियों की सहायता से घरों का सामान जबरदस्ती बाहर निकाला गया। विरोध करने आई महिलाओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।  हुडा विभाग की इस कार्यवाही से तपती दोपहरी में दर्जनभर परिवार सड़क पर खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। छोटे छोटे बच्चे, बूढ़े और महिलाएं आंसू बहाते रहे।

अपना आशियाना टूटता देख महिला ने अपने हाथों की नसों को तेज धार चीज से काटने की कोशिश की। इसमें उसके हाथ में कट लग गया। संत रविदास अमर कालोनी में हुई मकानों को तोड़ने की कार्रवाई के बाद जब यहां की निवासी महिला सोनू अपनी ड्यूटी निपटाकर पहुंची। सोनू ने इस तोड़फोड़ को प्रशासनिक अमले से रोकने की मांग की। मगर प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी रही।
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बताया गया है कि महिला सोनू ने अपने घर में जाकर तेजधार वस्तु से अपने हाथों की नस काटने की कोशिश की। इसमें उसके हाथों पर कट लग गया और खून निकलने लगा। बताया गया है कि महिला शहर के ही एक प्राइवेट स्कूल में सर्विस करती है। पुलिस कर्मचारी उसे अपनी गाड़ी में लेकर तुरंत शहर के नागरिक अस्पताल पहुंचे। यहां पर चिकित्सकों ने उसे प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी। 
 

महिलाओं और बच्चों को जबरदस्ती बाहर निकाला

मकान तोड़ने का विरोध
घरों में रहने वाली महिलाओं और बच्चों को सामान समेत जबरदस्ती बाहर निकाला गया और जेसीबी की सहायता से दीवारें और छत गिरा दी गई। बेबस परिवारों के घरों से सामान भी मेट्रो कर्मचारियों की मदद से प्रशासन ने बाहर निकलवाया। घरों को तोड़ने की कार्रवाई का विरोध करने आई महिलाओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। रोती बिलखती महिलाओं गुड्डी, कमलेश, किस्ने का कहना है कि अब वो इस गर्मी में जाए तो कहां जाएं। क्योंकि इन परिवारों का गुजर बसर सिर्फ मजदूरी से ही होता है।

क्या है मामला 
मामला दरअसल जमीन अधिग्रहण का है। जिस जमीन पर ये पीड़ित परिवार 30 सालों से रह रहे हैं उस जमीन को हुडा ने सेक्टर-9 के लिए अधिग्रहीत कर लिया था। बाद में हुडा ने ये जमीन डीएमआरसी को स्टॉफ क्वार्टर बनाने के लिए दे दी। डीएमआरसी के स्टॉफ क्वार्टर बनकर तैयार हो चुके हैं और अब उनमें रहने के लिए पोजिशन दी जानी है। बड़े और ऊंचे फ्लैट के बीच आधे कच्चे आधे पक्के मकान मखमल में टाट का पैबंध साबित हो रहे थे।

शायद इसलिए हुडा ने जल्दी में इस कार्यवाही को अंजाम दिया है। जल्दबाजी इसलिए ताकि कहीं हाईकोर्ट स्टे ना लगा दे। क्योंकि इन पीड़ित गरीबों की याचिका पर हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 18 मई को होनी है। बेघर हुए गरीबी रेखा से नीचे के इन परिवारों के समर्थन में शहर के कई समाजसेवी भी पहुंचे। 
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अनुसूचित जाति आयोग की शरण में भी गए थे परिवार

मकान तोड़ने का विरोध - फोटो : अमर उजाला
सालों पहले अनुसूचित जाति के इन परिवारों को जटवाड़ा गांव के लोगों ने अपनी पाना शामलात जमीन पर बसाया था। बाद में इनके नाम ही जमीन का इंतकाल और गिरदावरी भी हो गई। जमीन अधिग्रहण के विरोध में ये परिवार अनुसूचित जाति आयोग की शरण में भी गए थे, लेकिन वहां से भी इन्हें सिर्फ  इतना ही रिलिफ मिला कि प्रशासन को आयोग ने इन्हें दूसरी जगह आशियाना मुहैया कराने के निर्देश दे दिए।

इसके बाद ये लोग हाईकोर्ट में गए, जहां से इन्हें तोड़फोड़ और अधिग्रहण पर स्टे तो नहीं मिला, लेकिन 18 मई को इनके केस की तारीख जरूर मिली है। इसके बाद भी प्रशासन ने इस पूरी कार्यवाही को अंजाम दिया है। वहीं समाजसेवी बुल्लड़ पहलवान ने गरीबों के लिए पैसे देने व घर देने की बात कही है। उनका कहना है कि जब तक उन्हें कहीं कोई स्थान नहीं मिल जाता, तब तक वह उनको अपने क्वार्टरों में रहने के लिए जगह दे देंगे। 

क्या कहते हैं हुडा के एस्टेट आफिसर
हुडा विभाग के एस्टेट आफिसर विजय राठी का कहना है चूंकि इस जमीन का अधिग्रहण हो चुका है तो ऐसे में ये लोग अवैध कब्जा कर बैठे थे और हाईकोर्ट की तरफ से कोई स्टे भी नही था। इसलिए कब्जे हटवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि हुडा विभाग ने इन परिवारों को आशियाना स्कीम के तहत बनाए गए फ्लैट देने का ऑफर दिया था और आज भी वो ऑफर खुला है

ये परिवार चाहे तो आज से ही आशियाना फ्लैट में रह सकते हैं। वहीं गरीब परिवारों ने इन फ्लैटों का विरोध इसलिए किया था क्योंकि इन फ्लैट के बदले हुडा विभाग शुरूआत में 8 हजार रुपये जमा कराने के लिए 20 साल तक किस्तों में फ्लैट की कीमत वसूलना चाहता है। 
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