फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजाब: आईआईटी रोपड़ ने विकसित की प्रदूषण रहित शवदाह भट्ठी, कम खर्च और 12 घंटे के भीतर होगा अंतिम संस्कार

Thu, 13 May 2021 07:51 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, रोपड़ (पंजाब)

सार

भट्ठी के जलने पर पीली लपटें निकलती हैं। लेकिन यह हवा से प्रतिक्रिया कर धुआं रहित नीली लौ मे बदल जाती हैं। इसमें पहिए लगे हैं और आसानी से कही भी ले जाया जा सकता है। इसमें 48 घंटे की आम पारंपरिक प्रक्रिया के मुकाबले कूलिंग समेत 12 घंटे के भीतर निपटान हो जाता है।
विज्ञापन
पर्यावरण अनुकूल शवदाह भट्ठी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंजाब के रोपड़ स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने पर्यावरण अनुकूल शवदाह भट्ठी विकसित की है। बता दें कि देश में कोरोना की वजह से मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है। अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाटों पर लाइन लग रही है। अब आईआईटी द्वारा विकसित यह भट्ठी कम समय में धुआं रहित दाह संस्कार में लोगों की मदद करेगी। यह भट्ठी स्टेनलेस स्टील ने बनाई गई है। खास बात यह है कि इस भट्ठी में ऊर्जा की बर्बादी नहीं होती है। भट्ठी की तकनीक 'विकस्टोव' पर आधारित है।

विज्ञापन


भट्ठी के जलने पर पीली लपटें निकलती हैं। लेकिन यह हवा से प्रतिक्रिया कर धुआं रहित नीली लौ मे बदल जाती हैं। इसमें पहिए लगे हैं और आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। आईआईटी रोपड़ के डीन हरप्रीत सिहं ने कहा कि इस भट्ठी में 12 घंटे के भीतर शव का अंतिम संस्कार संपन्न हो जाता है।

यह 1000 डिग्री सेल्सियस से अधिक के तापमान पर काम करती है। प्रो. हरप्रीत सिंह ने कहा कि आमतौर पर एक शव को जलाने में लकड़ी पर लगभग 2500 रुपये खर्च आता है। इस कारण गरीब परिवार इस खर्च को वहन नहीं कर पाता है। वह अधजली हालात में या फिर नदी में बहा देते हैं। इस भट्ठी के दोनों तरफ स्टील का ढांचा होने से ऊर्जा का क्षय नहीं होता है और लकड़ी भी कम लगती है। बताया जा रहा है कि इस भट्ठी में एलपीजी सिलिंडर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें