पंजाब के रोपड़ स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने पर्यावरण अनुकूल शवदाह भट्ठी विकसित की है। बता दें कि देश में कोरोना की वजह से मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है। अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाटों पर लाइन लग रही है। अब आईआईटी द्वारा विकसित यह भट्ठी कम समय में धुआं रहित दाह संस्कार में लोगों की मदद करेगी। यह भट्ठी स्टेनलेस स्टील ने बनाई गई है। खास बात यह है कि इस भट्ठी में ऊर्जा की बर्बादी नहीं होती है। भट्ठी की तकनीक 'विकस्टोव' पर आधारित है।
भट्ठी के जलने पर पीली लपटें निकलती हैं। लेकिन यह हवा से प्रतिक्रिया कर धुआं रहित नीली लौ मे बदल जाती हैं। इसमें पहिए लगे हैं और आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। आईआईटी रोपड़ के डीन हरप्रीत सिहं ने कहा कि इस भट्ठी में 12 घंटे के भीतर शव का अंतिम संस्कार संपन्न हो जाता है।
यह 1000 डिग्री सेल्सियस से अधिक के तापमान पर काम करती है। प्रो. हरप्रीत सिंह ने कहा कि आमतौर पर एक शव को जलाने में लकड़ी पर लगभग 2500 रुपये खर्च आता है। इस कारण गरीब परिवार इस खर्च को वहन नहीं कर पाता है। वह अधजली हालात में या फिर नदी में बहा देते हैं। इस भट्ठी के दोनों तरफ स्टील का ढांचा होने से ऊर्जा का क्षय नहीं होता है और लकड़ी भी कम लगती है। बताया जा रहा है कि इस भट्ठी में एलपीजी सिलिंडर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।