आपने कभी ध्यान दिया है कि आपका बच्चा स्कूल और घर का काम पूरा कर पाता है या नहीं? उछलकूद ज्यादा करता है, कोई आपके घर आए तो उसकीजेब से मोबाइल निकाल लेता है। आपकी किसी बात पर ध्यान नहीं देता। स्कूल के शिक्षक शिकायत करते हैं कि आपका बच्चा अपनी सीट पर नहीं बैठता, तोड़फोड़ करता है।
वैसे तो ये तमाम लक्षण सामान्य बच्चों में भी होते हैं, लेकिन इन आदतों का दूसरे बच्चों की तुलना में ज्यादा होने पर एडीएचएडी (एटेंशन डिफिसिएट हायपर एक्टिविटी डिस्ऑर्डर) की संभावना बढ़ जाती है। सेक्टर-6 के जनरल अस्पताल में एडीएचएडी से पीड़ित करीब 15 बच्चे हर महीने पहुंचते हैं। इनमें छह से 17 साल के बच्चे होते हैं।
एडीएचएडी एक मानसिक बीमारी है। यदि आपका बच्चा हाइपर एक्टीविटी, इन अटेंशन, इमपल्सिबिटी करता है तो उसे ज्यादा एक्टिव समझने की भूल न करें। हो सकता है कि वह एडीएचएडी मानसिक बीमारी का शिकार हो। ऐसे बच्चे का मनोरोग चिकित्सक से चेकअप और काउंसिलिंग कराएं।
ये बच्चे होते हैं शिकार
- प्री मेच्योर बेबी
- हैरीडेट्री (पैरेंट्स को है तो बच्चों को हो सकता है)
- मदर को प्र्रेगनेंसी में दिक्त हुई हो
इन लक्षणों पर ध्यान दें
- क्या आपका बच्चा किसी काम को ठीक से नहीं समझ पाता है
- क्या आपके बच्चे को घर, खेल स्कूल में मन लगाने में दिक्कत होती है
- कोई बात कहने पर वह अनसुना कर देता है
- घर/ स्कूल का काम पूरा नहीं कर पाता
- दिमाग पर जोर डालने वाले कामों से जी चुराता है
- रोजाना के कामकाजों को भूल जाता है
- उठते समय हाथ, पैर, हिलाना और बेचैनी दिखाता है
- स्कूल शिक्षक बच्चे के बारे में सीट पर नहीं बैठने की शिकायत करते हैं
- बेवजह उछल कूद और भागदौड़ करता है
- खेलने और चुपचाप काम करने में मन नहीं लगता है
- बहुत ज्यादा बात करता है
- आधा सवाल सुनकर ही जवाब देने लगता है
कोट्स
अस्पताल में हर महीने इस तरह के 10-15 केस आते हैं। इनमें स्कूल गोइंग बच्चे ज्यादा हैं। यदि किसी बच्चे में एडीएचएडी की शिकायत है तो मनोरोग चिकित्सक से काउंसिलिंग और ट्रीटमेंट कराना चाहिए।
- डा. राजीव त्रेहन, मनोरोग चिकित्सक, जनरल अस्पताल