चंडीगढ़। यूटी प्रशासन चाहे तो अपने इकलौते चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीसीईटी) के हालात सुधार सकता है और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देकर उनके भविष्य का रास्ता साफ कर सकता है। इसके लिए प्रशासन को संत लौंगोवाल इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट संगरूर का पैटर्न अपनाना होगा और अपग्रेड होने के दौरान भी प्रशासन ने इस पैटर्न को अपनाने की हामी भरी थी। ऐसे में यूटी प्रशासन विद्यार्थियों के भविष्य को देखकर निर्णय लेगा तो हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।
सेंट्रल पॉलिटेक्निक कॉलेज की स्थापना सेक्टर-26 में 1959 में हुई थी लेकिन पेक के डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के बाद चंडीगढ़ का कोटा सुरक्षित रखने को पॉलिटेक्निक के दोफाड़ करते हुए अलग से सीसीईटी बना दिया गया। समझौता हुआ था कि संत लौंगोवाल इंस्टीट्यूट के नियम अपनाएंगे लेकिन आज तक नहीं अपनाए गए। जिस उद्देश्य से प्रशासन ने सीसीईटी का अपग्रेडेशन किया, उसका लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल रहा। सुविधाएं बहुत कम हैं।
विद्यार्थियों का तर्क है कि अब गेंद यूटी प्रशासन के पाले में है। जल्द से जल्द उनके लिए रास्ता निकाले। इससे लेटरल एंट्री भी अधिक होंगी और दोनों संस्थान मिलकर चलेंगे तो आगे भी बढ़ेंगे। इससे डिग्री विंग में एमई और पीएचडी भी रेगुलर हो सकेंगी। शिक्षक भी एक-दूसरे को अपना अनुभव बांट सकेंगे। विद्यार्थी भी आ-जा सकेंगे। इस प्रकरण को लेकर डिग्री व डिप्लोमा विंग के विद्यार्थी प्रदर्शन भी कर सकते हैं। वहीं इंप्लाइज यूनियन भी आगे की रणनीति तैयार कर रही है।