चंडीगढ़। शादी नहीं हुई होती तो मैं ब्रह्माकुमारी होती। जब पहली बार माउंटआबू गई और वहां जाकर देखा तो लगा कि मुझे भी यही पर रह जाना चाहिए। उस वक्त में एडवोकेट थी। पहली बार परिवार से अलग रही। तीन दिन तक रहने के बाद परिवार की याद नहीं आई। पहली अनुभूति हुई कि यदि शादी नहीं होती तो बीके होती।
यह बात रविवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की जस्टिस दया चौधरी ने सेक्टर 32 के एसडी कॉलेज के सभागार में सहज राजयोग द्वारा शांति, एकता एवं खुशहाली विषय पर आयोजित सेमिनार में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित होकर कही। यह सेमिनार पंजाब जोन की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अचल दीदी की पुण्य स्मृति में आयोजित हुआ।
उन्होंने विवेकानंद के कथन का उदाहरण देते हुए कहा कि आप संपर्क में हैं और कनेक्ट नहीं हैं तो जीवन सही नहीं होगा। मोबाइल पर गुड मार्निंग व अन्य मैसेज आते रहते हैं। इससे पता चलता है कि आप संपर्क में हैं, लेकिन कनेक्ट नहीं हैं। परिवार में एक जगह बैठकर बात नहीं होती। सभी के कमरों में टीवी लगे हैं, मोबाइल हैं। सोशल मीडिया के आने से हम सभी ने बहुत कुछ खोया भी है।
हमारी बात सुनने के बजाय अपनी सुनाते हैं: जस्टिस राजन गुप्ता
सेमिनार के दौरान पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस राजन गुप्ता ने कहा कि अचल दीदी से मिलने के लिए अपनी पत्नी के साथ जाता था। उनसे कई बातें सीखते थे। आजकल पति-पत्नी के झगड़े सुन रहे हैं। कई बार बुलाकर हाईकोर्ट समझाते हैं। वहां ब्रह्माकुमारी का माहौल नहीं होता। हमारी बात समझने के बजाय अपनी ही सुनाते हैं। उस वक्त लगता है कि उन्हें ब्रह्माकुमारी आश्रम में भेजना चाहिए, लेकिन ऐसा कर नहीं सकते। उस वक्त ऐसे हालात में जज पावरलेस हैं। जस्टिस राजन गुप्ता ने कहा कि आजकल हर आदमी किसी न किसी डर से डरा हुआ है। इसका उत्तर खोजने के लिए कई बार सेक्टर 15 स्थित ब्रह्माकुमारी आश्रम में जाते हैं। वहां जवाब मिलता है। उन्होंने कहा कि राजयोग मेडिटेशन से सब जवाब मिलता है।