-महिला होने के आधार पर दाखिल जमानत याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट का अहम आदेश
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम आदेश सुनाते हुए कहा है कि जब भी एनडीपीएस के मामलों में बड़ी बरामदगी होती है और विदेशी नागरिकों की संलिप्तता पाई जाए तो जांच एजेंसियों को अपनी जांच का संक्षेप विदेश मंत्रालय के साथ साझा करना चाहिए। इसके बाद यह मंत्रालय पर निर्भर करेगा कि वह संबंधित देश की सरकार के साथ जानकारी साझा करे या नहीं। हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट में एनडीपीएस के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, खास तौर पर पाकिस्तान से।
दुनिया के सबसे विकसित देश भी नशा तस्करी और नशाखोरी की समस्या से जूझ रहे हैं। हाईकोर्ट के समक्ष एनडीपीएस मामले में जमानत की मांग से जुड़ी याचिका सुनवाई के लिए पहुंची थी। इस मामले में पुलिस ने सह-आरोपी सतीश से एक किलो हेरोइन बरामद की थी। आरोप है कि नशीले पदार्थों की बिक्री से प्राप्त धनराशि वह लक्की की पत्नी नेहा को सौंपता था और उसने याचिकाकर्ता सीमा को भी हेरोइन बेची थी। सीमा ने महिला होने के आधार पर जमानत मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि गंभीर अपराधों में केवल महिला होने के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने माना कि भले ही बरामदगी सीधे सीमा से नहीं हुई है, लेकिन डिजिटल साक्ष्यों से उसकी संलिप्तता साबित होती है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का पूर्व आपराधिक रिकार्ड और पहले एक मामले में 10 साल की सजा उसके खिलाफ जाता है। कोर्ट ने जांच एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी से निपटने के लिए विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय बनाने की सिफारिश की।