मोटर एक्सीडेंट क्लेम के मामलों में यदि ड्राइवर का लाइसेंस फर्जी पाया जाता है तो वाहन मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाते हुए मोहन फाइबर प्रोडक्ट लिमिटेड को क्लेम राशि का भुगतान करने के पटियाला मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के फैसले को पलट दिया। साथ ही बीमा कंपनी को भुगतान के आदेश दिए हैं।
मामला पटियाला में 1994 में हुई एक दुर्घटना से जुड़ा है। पटियाला के अर्बन एस्टेट में मोहन फाइबर प्रोडक्ट लि. के वाहन ने एक स्कूटर को टक्कर मार दी थी। इसमें स्कूटर सवार स्वर्ण सिंह की मौत हो गई थी। इस टक्कर के बाद स्वर्ण सिंह की विधवा ने क्लेम के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में केस दायर किया। ट्रिब्यूनल ने पाया था कि ड्राइवर का लाइसेंस फर्जी है, इसलिए इंश्योरेंस कंपनी भुगतान के लिए बाध्य नहीं है। इसके बाद 60 हजार क्लेम राशि तय करते हुए ड्राइवर और मालिक को समान रूप से भुगतान करने के आदेश दिए थे। इस फैसले के खिलाफ मोहन फाइबर और मृतक की पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की।
मोहन फाइबर ने क्लेम की राशि को चुनौती देते हुए इंश्योरेंस कंपनी को भुगतान करने केआदेश जारी करने जबकि मृतक की पत्नी ने क्लेम राशि को बढ़ाने के लिए अपील दाखिल की थी। क्लेम राशि बढ़ाने की अपील हाईकोर्ट ने मृतक की वृद्ध आयु के चलते खारिज कर दी, जबकि मोहन फाइबर की अपील को स्वीकार कर लिया।