चंडीगढ़। प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल की अध्यक्षता में बुधवार को राज्यस्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक हुई। इसमें अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि नगर निगम में 13 गांवों के शामिल होने के बाद अब चंडीगढ़ का जीआईएस बेस्ड डिजिटल वार्ड मैप जल्द तैयार किया जाए। साथ ही कहा कि मौत चाहे जिस कारण हो, पहचान जरूरी है। शहर में होने वाली मौतों का 100 प्रतिशत चिकित्सा प्रमाणन किया जाए। इनमें कोरोना से होने वाली मौतें भी शामिल हैं।
आदेश में कहा गया कि आरबीडी एक्ट और कोर्ट के आदेशों के तहत भी मौतों के कारणों का चिकित्सा प्रमाणन होना जरूरी है। स्वास्थ्य सचिव और मुख्य रजिस्ट्रार को जन्म व मृत्यु के 15 दिन के अंदर पंजीकरण करने को कहा गया। जन्म और मृत्यु का 100 प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों का निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए गए हैं। चंडीगढ़ के सभी अस्पतालों में प्रमुख स्थानों पर सूचना साइन बोर्ड भी लगाया जाएगा, जिसमें लोगों को जन्म और मृत्यु पंजीकरण की जानकारी दी जाएगी। बैठक में चंडीगढ़, पंजाब के निदेशक ऑपरेशन्स डॉ. अभिषेक जैन भी उपस्थित थे।
बैठक में जनगणना के आंकड़े और शहरी स्थानीय निकायों में इसके उपयोग पर कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। बैठक में जनगणना के विभिन्न पहलुओं नागरिक पंजीकरण प्रणाली, मैपिंग, मौतों के कारणों का चिकित्सा प्रमाणन पर प्रेजेंटेशन दी गई।
जनगणना देश का सबसे बड़ा प्रशासनिक अभ्यास : डॉ. अभिषेक जैन
बैठक को संबोधित करते हुए निदेशक ऑपरेशन्स डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि जनगणना देश का सबसे बड़ा प्रशासनिक अभ्यास है, जो राज्य सरकार की मशीनरी के सक्रिय सहयोग और भागीदारी के साथ आयोजित किया जाता है। सलाहकार धर्मपाल ने जनगणना निदेशालय के प्रयासों की सराहना की और बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों को भारत सरकार और जनगणना निदेशालय के विभिन्न निदेर्शों को सही मायने में लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने विभिन्न कार्यों के लिए समय सीमा भी निर्धारित की, ताकि इनमें देरी न हो। बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन के सभी प्रशासनिक सचिवों और जनगणना ऑपरेशन निदेशालय के अधिकारियों ने भाग लिया। केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ से संबंधित जनगणना विभाग के महत्वपूर्ण प्रकाशनों की एक छोटी प्रदर्शनी भी प्रदर्शित की गई।