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SSP देंगे 4 हफ्तों में 4 सवालों के जवाब

Wed, 26 Mar 2014 12:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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आईएएस तन्वी गर्ग और ज्वैलर विक्रांत के बीच गाड़ी को साइड न देने को लेकर हुए विवाद में पुलिस की ओर से भेजे गए जवाब से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग संतुष्ट नहीं है।
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आयोग ने एसएसपी से इस संबंध में चार सवालों के जवाब चार हफ्ते में मांगे हैं। उधर सेक्टर-44 के रहने वाले पीड़ित विक्रांत भी इस मामले में अपना जवाब आयोग को भेज चुके हैं। विक्रांत ने अपने जवाब में कहा है कि उन्हें हिरासत में रखा गया था लेकिन उनका इस मामले में तत्कालीन एसडीएम के कार चालक के साथ समझौता हो चुका है।

शिकायतकर्ता पंकज चांदगोठिया उनके वकील नहीं है। मालूम हो कि एसडीएम तन्वी गर्ग के चालक की शिकायत पर 17 अप्रैल, 2013 को आभूषण विक्रेता को गिरफ्तार किया गया था।
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यह मामला उजागर होने के बाद वकील पंकज चांदगोठिया ने आभूषण विक्रेता को 18 घंटे तक हिरासत में रखने को अवैध बताते हुए आयोग में अर्जी दाखिल की थी। इस मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने जनवरी माह में एक लाइन का यह जवाब दिया था कि दोनो पक्षों के बीच समझौता हो चुका है।

आयोग ने पूछे हैं यह सवाल
- क्या एसडीएम के कार चालक ने इस मामले में पुलिस के पास आभूषण विक्रेता की शिकायत दर्ज करवाई थी। अगर हां तो उस शिकायत की प्रति भेजी जाए
- क्या कानून के तहत विक्रांत को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में रखा गया था
- क्या विक्रांत के खिलाफ सीआरपीसी की धारा-107-151 के चार्ज लगाए गए हैं। अगर हां तो मामले की चार्जशीट आयोग को भेजी जाए
- कितने समय के लिए विक्रांत को हिरासत में रखा गया। गिरफ्तारी का समय और मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने का समय भी बताया जाए।

यह भी कहा है आयोग ने
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यह भी कहा कि तथ्य यह भी कहते है कि 18 घंटे तक विक्रांत को हिरासत में रखा गया है। ऐसे में यह जानकारी लोगों के सामने आनी चाहिए कि किस कारण से एक व्यक्ति को हिरासत में रखा गया है। आयोग आपराधिक मामलों में हुए समझौते को नहीं मानता है।

शायद पुलिस के दबाव में है विक्रांत: चांदगोठिया
वकील पंकज चांदगोठिया का कहना है कि आयोग ने एसएसपी को चार सवालों का जवाब देने के 18 मार्च को आदेश दिए हैं। आदेश की प्रति उन्हें मंगलवार को मिली है।

उन्होंने कहा कि आयोग आपराधिक मामलों में हुए समझौतों को नहीं मानता है। विक्रांत ने जो जवाब आयोग को भेजा है, वह शायद पुलिस के दबाव में दिया है। उनका कहना है कि 18 घंटे तक जब अवैध तरीके से विक्रांत को हिरासत में रखा गया था तो शहर में प्रदर्शन भी हुए थे।
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मालूम हो कि लोगों के रोष के बाद ही प्रशासन ने एसडीएम के चालक और विक्रांत के बीच पिछले साल समझौता करवाते हुए मामला खारिज कर दिया था।
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