हरियाणा सरकार ने कोर्ट में कहा था कि आईएएस खेमका के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज करने से पहले सरकार से मंजूरी लेना जरूरी था लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया था। बल्कि बाद में सरकार को इसके लिए पत्र लिखा था, जिसे सरकार ने इनकार कर दिया था। इससे अशोक खेमका को बड़ी राहत मिल गई थी।
वहीं, अभिलेखागार के अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक खेमका द्वारा संजीव वर्मा के खिलाफ पंचकूला के सेक्टर 5 थाने में केस दर्ज कराया गया था। अब एफआईआर में भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा जोड़ दी गई है। खेमका ने वर्मा पर उत्पीड़न और मानहानि का आरोप लगाया था। इसी केस में नई धारा जुड़ते ही आईएएस संजीव वर्मा ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। वर्मा का कहना है कि पहले से दर्ज एफआईआर में अब भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा जोड़ दी गई लेकिन इसका आधार क्या है, ये नहीं बताया गया है। दोनों ही अधिकारियों में पिछले काफी समय से विवाद चल रहा है। दोनों अधिकारियों में ट्वीट वार भी चलता रहता है।
मैं पहले दिन से मेरी खुद की भी जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहा हूं। साथ ही आईएएस अशोक खेमका और मेरे मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए मुख्य सचिव को छह पत्र लिख चुका है। सीबीआई जांच से ही दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा। इसलिए सरकार को ये दोनों ही मामले सीबीआई को सौंप देने चाहिए। संजीव वर्मा, मंडलायुक्त, रोहतक।