सीनियर आईएएस अशोक खेमका की शिकायत पर जिस गेहूं बीज घोटाले की सीबीआई प्रारंभिक जांच कर रही है। उस मामले में जिस एजेंसी ने 10000 क्विंटल बीज सप्लाई किया था, वह नैफेड से अधिकृत थी, मगर जांच अधिकारी ने उसे अनधिकृत बताया।
हरियाणा सरकार पहले ही इस जांच रिपोर्ट को रददी की टोकरी में डाल चुकी है। मगर सीबीआई उस जांच रिपोर्ट के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार यूनाइटेड एग्रो सीड्स कारपोरेशन 30 जून, 2009 को नैफेड ने इंपैनलमेंट दी थी। नैफेड के कार्यकारी निदेशक (सीड) वाईके जैन ने 18 मई, 2010 को यूनाइटेड सीड्स को पत्र लिखकर इंपैनलमेंट जारी रखने के लिए पांच लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा कराने को कहा।
यूनाइटेड सीड्स ने 17 अगस्त, 2010 को पांच लाख रुपये का ड्राफ्ट जमा करा दिया। हरियाणा बीज विकास निगम ने नैफेड से 3 नवंबर, 2010 को गेहूं बीज की उपलब्धता और रेट पूछा था।
अगले दिन 4 नवंबर को नैफेड ने निगम को जानकारी दी थी कि 10000 क्विंटल बीज 2050 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उपलब्ध है। निगम ने ऑर्डर दे दिया और नैफेड ने यूनाइटेड एग्री सीड्स कारपोरेशन दिल्ली से बीज खरीदकर निगम को सप्लाई किया था।
यूनाइटेड सीड्स ने 20 दिसंबर, 2010 को नैफेड मुख्यालय के मैनेजर सीड्स को पत्र लिखा कि उन्होंने पांच लाख रुपये का ड्राफ्ट जमा करा दिया था मगर अब तक इंपैनल जारी रखने का पत्र नहीं मिला है।
नैफेड मुख्यालय ने लुधियाना ब्रांच इंचार्ज को 30 दिसंबर को पत्र लिखा कि नियमानुसार इंपैनलमेंट जारी रखने की कार्रवाई लुधियाना ब्रांच के स्तर पर होनी है।
लुधियाना ब्रांच ने यूनाइटेड सीड्स कारपोरेशन का इंपैनलमेंट तीन साल के लिए जारी रखने का एग्रीमेंट 3 जनवरी, 2011 को कर लिया।
लुधियाना ब्रांच इंचार्ज के आग्रह पर नैफेड मुख्यालय ने 22 फरवरी, 2011 को यूनाइटेड एग्री सीड्स कारपोरेशन से बीज खरीदकर हरियाणा बीज विकास निगम को सप्लाई की गई कार्रवाई को भी मंजूरी दे दी। इससे नैफेड को 6 लाख रुपये का कमीशन मिला था।
जांच अधिकारी ने बताई थी अनधिकृत
अशोक खेमका की शिकायत पर सीबीआई के पत्र मिलने के बाद नैफेड ने अपने एक मैनेजर से जाचं कराई। उन्होंने जांच रिपोर्ट में लिखा कि नैफेड ने जिस एजेंसी से बीज खरीदकर सप्लाई किया था, वह नैफेड के पास अधिकृत (इंपैनल) नहीं थी। इस पर हरियाणा सरकार ने जांच रिपोर्ट को गलत ठहराया और रद्दी की टोकरी में डाल दिया।