राबर्ट वाड्रा लैंड डील को उजागर कर चर्चा में आए आईएएस अशोक खेमका के खिलाफ कांग्रेस को फिर से निशाना साधने का मौका मिल गया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव, एक्साइज एंड टेक्सेशन रोशन लाल ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि अशोक खेमका ने रैक्सिल 2 डीएस की खरीद को स्वयं प्रोत्साहित किया था। इस पत्र को आधार बनाते हुए कांग्रेसी विधायक करण सिंह दलाल ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर मांग की है कि जो अधिकारी स्वयं आरोपों के घेरे में है, उसकी सिफारिश पर वाड्रा लैंड डील की जांच का क्या औचित्य है।
उन्होंने राज्यपाल से रैक्सिल खरीद की सीबीआई जांच में खेमका की भूमिका की भी जांच कराने की मांग करते हुए ढींगरा कमीशन को रद् करने की मांग की है। शुक्रवार को एक प्रैस कांफ्रेंस में करण दलाल ने पत्रकारों को रोशनलाल के इस पत्र की प्रतियां भी उपलब्ध कराईं, जो मुख्य सचिव के नाम गत आठ मार्च को लिखा गया था। उन्होंने कहा कि अशोक खेमका पर एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा जो आरोप लगाए गए हैं, उससे साफ होता है कि खेमका दोहरे चरित्र के व्यक्ति हैं।
करण दलाल ने कहा कि खेमका द्वारा अधिकारियों व नेताओं पर आरोप लगाना नया नहीं है। वे पूर्व सीएम हुड्डा से पहले चौटाला और बंसीलाल पर भी आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने कहा कि रोशनलाल के पत्र ने खेमका की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। प्रदेश की भाजपा सरकार को चाहिए कि वे रोशनलाल के पत्र को गंभीरता से ले। कांग्रेस भी यह मांग करती है कि रैक्सिल मामले में जो सीबीआई जांच चल रही है।
उसके तहत रोशनलाल की मांग के अनुसार, खेमका के खिलाफ भी जांच की जाए। खेमका को प्रधान सचिव पदोन्नत किए जाने पर सवाल उठाते हुए दलाल ने कहा कि खेमका की प्रमोशन नियमों केखिलाफ है। दलाल ने आरोप लगाया कि भाजपा ने खेमका के सहारे राजनीतिक लाभ लिया। उन्होंने कहा कि वाड्रा लैंड डील मामले में कोई दम नहीं है। खेमका को मूंगदाल बीज मामले में विजिलेंस की क्लीन चिट को दलाल ने सरकार में दबाव में दी गई क्लीन चिट करार दिया।
रोशनलाल ने पत्र में यह लिखा मुख्य सचिव को
मूंगदाल बीज खरीद मामले में विजिलेंस जांच में क्लीन चिट हासिल कर चुके अशोक खेमका के खिलाफ वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रोशनलाल ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में आरोप लगाया हैकि कृषि विभाग में रहते हुए अशोक खेमका ने जिस कीटनाशक रैक्सिल 2 डीएस की खरीद में घोटाले को उजागर किया था, दरअसल इस कीटनाशक की खरीद को खुद अशोक खेमका ने ही प्रोत्साहित किया था।
वर्ष 2007 में खेमका जब कृषि विभाग के निदेशक थे, उस समय उनके अधीन काम कर रहे एक अधिकारी से मिली जानकारी का हवाला देते हुए रोशनलाल ने पत्र में लिखा है कि खेमका ने गेहूं को लगने वाले करनाल बंट रोग केनिदान के लिए न सिर्फ ब्रांडेड कीटनाशक- वीटावैक्स, बावीस्टिन और रैक्सिल के उपयोग को प्रोत्साहित किया, बल्कि 16 अक्तूबर, 2007 को चार प्रमुख अखबारों में यह विज्ञापन भी छपवाया, जिसमें कहा गया कि करनाल बंट रोग को रैक्सिल के प्रयोग से नियंत्रित किया जा सकता है।