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पौधों से है बेहद प्यार.. बच्चों की तरह रोज छह घंटे करती हैं देखभाल

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चंडीगढ़। 13 वर्ष की उम्र से मैंने बागवानी की शुरुआत कर दी थी। बागवानी अपने माता-पिता से सीखी। बागवानी करते-करते पौधों की भाषा समझ में आने लगी। जिस प्रकार से आप अपने परिवार में बेटे-बेटियों के चेहरों को देखकर पता करते हैं, ठीक उसी तरह पौधों का भी हैं। उनके पास रहने से पौधों की भाषा समझी। उन्हें कब धूप-छांव और पानी-खाद कब चाहिए, यह सब पता चलता है। यह कहना है सेक्टर- 18 की कोठी नंबर 569 की रहने वाली डॉ. अलका एस ग्रोवर का।
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डॉ. ग्रोवर रसायन विज्ञान की प्रोफेसर और ज्योतिषी हैं। उन्होंने बताया कि रोज माली उनके बगीचे में काम करते हैं। वह भी करीब छह घंटे बागवानी को देती हैं। उन्होंने कहा कि बगीचे में काम करते हुए पौधों को संगीत भी सुनाती हैं। पौधे भी संगीत के शौकीन हैं। इन्हें इंस्ट्रूमेंटल संगीत सुनाती हैं। उन्होंने बताया कि हर पौधों से बात करना उनकी दिनचर्या हो गई है। उन्होंने बताया कि वे मौसम के हिसाब से फूल लगाती हैं। अधिक फूल गमले में हैं ताकि उन्हें धूप, छाया और बारिश के हिसाब से रखा जाए।
किताबें पढ़कर बेहतरीन किया बगीचे को
उन्होंने कहा कि बगीचे को बेहतर बनाने के लिए किताबें पढ़नी शुरू कर दीं। उनकी मां गुलदाउदी लगाती थीं। बगीचे को और बेहतर किस प्रकार बनाया जाए, इसके बारे में किताबें पढ़नी शुरू कर दी। इसमें छोटे बगीचे के डिजाइन के बारे में पढ़ना शुरू किया। फैक्टरी के वेस्ट चीजें लाकर बगीचे को सजाया।
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बगीचे में महक रहे ये पौधे
कलौडियम, पाम, क्रिसमस ट्री, जीनिया, अपराजिता, पौलिएस, फोटो लाका, विंका, जरेनियम, कास्कॉम, लिली, बोगलवेलिया, सरू, सूर्यमुखी, हैविकस, कोचिया, डैफनवेसिया, फूटबॉल लिली के अलावा खिड़की पर छाया के लिए कर्टन क्रीपर और हैंगिंग वेल भी लगाए हैं। रात में खुशबू देने वाली मधुमालती का वेल भी लगाई हैं। घर में टैरेस्ड गार्डन भी बेहतरीन तरीके से सजाया है। फलों में आम, चीकू, अंजीर, जामुन, पपीता अंगूर सहित अन्य पौधे लगाए हैं।
खुद से तैयार करती हैं खाद
उन्होंने बताया कि घर में ही किचन वेस्ट से खाद तैयार करती हैं। सर्दियों में मुर्गी की बीट पौधों में डालते है। कीड़े न लगे इसके लिए नीम के पत्तों को सुखाकर उसे जलाकर राख बनाते हैं। उस राख को पौधों के उपर छिड़काव करती हैं। साथ में खाद में भी मिलाते हैं।
ऐसे तैयार करती हैं छिड़काव के लिए घोल
उनका कहना है कि पौधों में कीड़े न लगे इसके लिए नीम का पता दो घंटे तक उबालते हैं। फिर उसके ठंडा होने पर पौधों पर छिड़काव करते हैं। इसके छिड़काव से पौधों में कीड़े नहीं लगते हैं।
फार्म हाउस पर बनाया नक्षत्रों के अनुसार लगाए हैं पेड़
डॉ. अलका एस ग्रोवर का कहना है कि प्रत्येक ग्रह और राशियों के अपने वृक्ष होते हैं। उसी तरह प्रत्येक नक्षत्र के भी अपने वृक्ष होते हैं। उनका कहना है कि जिस व्यक्ति का जो नक्षत्र हैं उस नक्षत्र का पेड़ लगाए। अपने फार्म हाउस में उन्होंने नक्षत्र के हिसाब से पेड़ लगाए हैं।
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