एक जवान को ड्यूटी करते समय पता होता है कि कभी भी उसकी जान जा सकती है, लेकिन वह देश की सुरक्षा के लिए आखिरी सांस तक लड़ता रहता है। कुछ ऐसा ही जज्बा ड्यूटी करते समय मैंने महसूस किया। यह कहना है पीजीआई के कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल की आईसीयू में ड्यूटी करने वाली शिवानी ठाकुर का। शिवानी ठाकुर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर की रहने वाली हैं। शिवानी ठाकुर ने बताया कि वह पिछले 3 महीने से अपने घर नहीं गई हैं। शिवानी ठाकुर अपने माता-पिता की लाडली हैं। माता-पिता सरकारी टीचर हैं। शिवानी कहती हैं कि खुशनसीब हूं कि कोरोना संकट के समय देशसेवा का मौका मिला।
मरीज के जज्बे को देखकर मिला हौसला
शिवानी ठाकुर की जब उनकी कोरोना पेशेंट के वार्ड में ड्यूटी लगी तो वह काफी घबरा गई थीं। उन्होंने इस बारे में अपने माता पिता से भी बात की। उनके माता-पिता भी काफी चिंतित हो गए। जब वह ड्यूटी करने आईसीयू में पहुंची तो उन्होंने देखा कि मरीज पहले से इतने प्रेरित थे कि उनके मन में किसी भी प्रकार का डर नहीं था। वह एक आम मरीज की तरह व्यवहार कर रहे थे। मरीजों के इस जज्बे को देखकर उन्हें बहुत हौसला मिला। सोचा कि यह कोरोना पीड़ित केवल हम पर विश्वास कर अपनी जिंदगी की आस लगाते हैं। अगर ऐसी स्थिति में हमने ही हार मान ली तो पेशेंट को कैसे हिम्मत मिल पाएगी।
आती है मां की याद तो करती हैं वीडियो कॉल
शिवानी ठाकुर ने बताया कि पिछले 3 महीनों में उन्होंने अपनी मां को बहुत याद किया है क्योंकि मां और बेटी का रिश्ता कुछ अलग ही होता है। उन्होंने बताया कि जब भी उन्हें अपनी मां की याद आती है, वह वीडियो कॉल से अपनी मां के साथ बात करती हैं। उन्होंने बताया कि 7 दिन ड्यूटी करने के बाद 14 दिन आइसोलेशन वार्ड में रहने के बाद जब वह वापस आईं तो उन्हें खुद पर गर्व महसूस किया। उन्होंने महसूस किया कि वह खुशनसीब हैं, जिन्हें देश सेवा में योगदान करने का मौका मिला।