चंडीगढ़। चंडीगढ़ और पंजाब में अब ब्रह्मा कुमारियां नशे के खिलाफ अभियान चलाने जा रही हैं। पंजाब के राज्यपाल व यूटी प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने रविवार को सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में एक कार्यक्रम के दौरान अभियान का शुभारंभ किया। प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने मंच से संबोधित करते कहा- मैं भी दूध का धुला नहीं, 38 वर्ष की उम्र में पहली बार नागपुर से विधायक बना। किसी ने तंबाकू की लत लगा दी। पान वाले खासतौर पर तंबाकू-चूने वाला पान बनाने लगे। लोगों को भी पता चल गया कि मैं तंबाकू का शौकीन हूं। लोग मिलने आते तो साथ में तंबाकू की पुड़िया लाने लगे। कुछ साल बाद 1984 में सांसद बन दिल्ली पहुंचा तो वहां भी मंत्रियों आदि को पता चला कि मुझे तंबाकू का शौक है। मेरी पत्नी इस आदत से दुखी थी और चाहती थी कि उसका सुहाग जिंदा रहे क्योंकि तंबाकू से कैंसर जैसे घातक रोग होते हैं। एक बार व्यापक स्तर पर गायत्री मंत्र का पाठ रखवाया गया था। इसमें मेरे परिवार के सभी सदस्य शामिल थे। आचार्य बोले कोई बुरी चीज हो जो छोड़ना चाहते हो। एकदम से पत्नी बोली-तंबाकू छोड़ दो। तभी से भगवान के नाम पर तंबाकू छोड़ दिया और कभी हाथ नहीं लगाया। पुरोहित बोले कि गीता सर्वोच्च ग्रंथ है। इसे अपनाने और इसके प्रचार-प्रसार की जरूरत है। आगे कहा कि धर्म की जड़ को हरा-भरा और मजबूत रखना होगा। जात-पात से ऊपर उठना होगा, तभी भारत विश्व-गुरु बनेगा। इस मौके पर ब्रह्मा कुमारियों की स्वास्थ्य इकाई, माउंट आबू के सचिव डॉ. बनारसी लाल शाह भी पहुंचे थे। इस दौरान राजयोगिनी सुषमा दीदी मुख्य वक्ता थीं।
पंजाब में नशा बड़ी समस्याः पुरोहित
प्रशासक पुरोहित ने कहा कि पंजाब में नशा बड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि वह असम और तमिलनाडु के भी राज्यपाल रहे हैं मगर पंजाब में नशा बड़ी समस्या है। पड़ोसी देश पाकिस्तान से ड्रोन से भी यह पंजाब पहुंच रहा है। इस पर नकेल कसने की जरूरत है। हालांकि, सीमा पर बीएसफ मुस्तैदी से कार्रवाई में लगी है। इसके लिए लोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा। यह राजनीतिक मुद्दा भी बना है। उन्होंने कहा कि कुछ भ्रष्ट पुलिसकर्मी भी हैं, जिन पर कार्रवाई की जरूरत है। कहा कि पहली बार वह वर्ष 1975-76 में एक निमंत्रण पर माउंट आबू ब्रह्मा कुमारियों के कार्यक्रम में गए थे। उनका वहां अद्भुत अनुभव रहा था। जिसके बाद वर्ष 1986 में फिर वहां जाना हुआ। उन्होंने ब्रह्मा कुमारियों की ओर से नशे के खिलाफ चलाए अभियान की प्रशंसा करते कहा कि इससे लोगों की जिंदगी में सार्थक बदलाव आएगा।
नशा छोड़ने के लिए सकारात्मक सोच जरूरी
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि सकारात्मक सोच के साथ नशे समेत कई बीमारियों पर विजय पाई जा सकती है। जीवन में खुशियां भरने का अभियान शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया। कहा गया कि दिल समेत शरीर के कई अंग ट्रांसप्लांट हो सकते हैं मगर दिमाग ट्रांसप्लांट नहीं हो सकता। इसमें सिर्फ बदलाव ही एक विकल्प है। तेजी से बदलते समय के साथ-साथ चिंतन को बदलने पर जोर दिया गया। वहीं अपने अंदर पाजिटिव भावनाएं पैदा करने के लिए प्रेरित किया। डॉ. बनारसी लाल शाह ने कहा कि नशे से मुक्ति पाने के लिए ध्यान काफी सफल तरीका है, जिसमें 97 प्रतिशत तक नतीजा आता है। देश भर में ब्रह्मा कुमारियां नशे के खिलाफ अभियान चला रही हैं। इसे लेकर केंद्र के साथ एक एमओयू भी इसी मार्च में साइन किया गया था।
11 लाख लोगों को पहुंचा चुके हैं लाभ
ब्रह्मा कुमारियों की ओर से अभी तक पांच से छह लाख लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक किया जा चुका है। 11 लाख लोगों को इससे लाभ पहुंचा है। 10 लाख लोगों ने नशे से दूर रहने की शपथ भी ली है। बताया गया कि देश में लगभग 65 प्रतिशत लोग युवा हैं। विदेशी ताकतें देश की इस युवा शक्ति को खत्म करने में लगी हैं। रोजाना साढ़े पांच हजार युवा नशे की दलदल में गिर रहे हैं। कॉलेजों-हॉस्टल, विश्वविद्यालय तक नशा पहुंच रहा है। राजयोगी जीवन शैली अपना इससे बचा जा सकता है। वहीं दावा किया गया कि राजयोग से दिल की बंद धमनियां भी खुल रही हैं। एंजियोग्राफी में यह साबित हो रहा है। इससे लगभग 15 हजार दिल के मरीजों को लाभ पहुंचा है।