बहलाना निवासी एक पति ने धोखे से अपनी पत्नी को तलाक दे दिया। बीते 2 मार्च को ही अदालत ने फैसला सुनाया था। अब पीड़िता ने अदालत में आवेदन दायर कर फैसले को रद्द करने की मांग की है।
2005 में उनका प्रेम विवाह हुआ था। उनके 11 और 7 साल के दो बच्चे हैं। पीड़िता ने बताया कि उनके पति एक बैंक की कैश वैन के साथ सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। 2015 से दोनों के छोटे-मोटे झगड़े शुरू हुए थे। दोनों महिला सेल भी गए थे।
2017 में उनका समझौता भी कराया गया, लेकिन 2018 में कब आरोपी ने तलाक की याचिका दायर कर दी पीड़िता को पता ही नहीं चला। इसके बाद बीते 2 मार्च को अदालत ने तलाक को मंजूरी दे दी। अब पीड़िता ने अदालत में आवेदन दायर कर फैसले को रद्द करने की गुहार लगाई है। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।
ऐसे दिया धोखा..
पीड़िता ने याचिका में कहा कि उसके पति ने विश्वास में लेकर उससे हस्ताक्षर करा लिए और अदालत में तलाक याचिका दायर की। उसका पति किसी अन्य मामले में गवाह के रूप में हस्ताक्षर करने का बहाना बनाकर उसे अदालत ले गया। उसने कहा कि तलाक के बाद भी उसका पति जुलाई तक उसके साथ रहा है।
दो साल से एक घर में रहते हुए आरोपी ने कभी पीड़िता को तलाक याचिका और एक्स पार्टी तलाक फैसले के बारे में पता नहीं लगने दिया। एडवोकेट गीतांजलि वाधवा ने कहा कि जब पति ने याचिका दायर की थी, तब भी पति और पत्नी एक साथ रह रहे थे। पीड़िता ने अपने पति पर विश्वास कर बिना पढ़े हस्ताक्षर कर दिए।
पति ने उसके विश्वास का फायदा उठाकर दस्तावेजों का दुरुपयोग किया। जांच के बाद उसे पता चला कि आरोपी ने 2018 में ही याचिका दायर कर दी थी और 2 मार्च को धोखाधड़ी करके उसे तलाक दे दिया गया है।