कमाल हो गई, मां-बाप होने का सबूत नहीं दो सके। आंखों के सामने उनकी तीन अबोध बच्चियों को अनाथालय भेज दिया गया। मामला हरियाणा के पानीपत का है। जीटी रोड स्थित रोड धर्मशाला के पास सोमवार देर रात रोती मिली तीन बच्चियों को ढूंढते हुए उनके माता-पिता सीडब्ल्यूसी कार्यालय पहुंचे। वहां मां-बाप रोते-गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन खुद के बच्चियों के माता-पिता होने का सबूत नहीं दे सके।
इसके बाद अधिकारियों ने उनके कलेजे के टुकड़ों को उन्हें सौंपने से साफ इनकार कर दिया। परिजन किसी भी बच्ची का आधार कार्ड या दूसरे डॉक्यूमेंट पेश नहीं कर पाए। सीडब्ल्यूसी अधिकारियों ने पुलिस की सहायता से तीनों बच्चियों का सिविल अस्पताल में मेडिकल करवाया। इसके बाद सभी को मां-बाप की आंखों के सामने ही जाटल रोड स्थित शोंधापुर स्थित बाल अनाथालय भेज दिया।
अधिकारियों ने परिजनों को बच्चियों से संबंधित डॉक्यूमेंट पेश कर बच्चियों को अपने साथ ले जाने की बात कही है। दूसरी और सोमवार देर रात रेलवे स्टेशन पर एक बच्ची लावारिस हालत में मिली। जीआरपी ने बच्ची को बाल अनाथालय भिजवाया। जीटी रोड स्थित रोड़ धर्मशाला के पास सोमवार रात करीब साढ़े बारह बजे तीन बच्चियां रोती मिली थीं।
बिशनस्वरूप कॉलोनी निवासी अमित यमुना एन्क्लेव में रहने वाले अपने दोस्त से मिलकर लौट रहे थे। उन्होंने तीनों बच्चियों को रोते देखा तो इसकी सूचना सेक्टर छह पुलिस चौकी को दी। पुलिस ने बच्चियों के परिजनों को तलाश किया, लेकिन वे नहीं मिले। पूछताछ में बच्चियों ने अपना नाम रेखा, गुड्डो और अंशुल बताया। मंगलवार सुबह तीनों बच्चियों को सीडब्ल्यूसी कार्यालय ले जाया गया।
बच्चियों को ढूंढते हुए मां-बाप पहुंचे सीडब्ल्यूसी
तीन बच्चियों की अनोखी कहानी
जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सुमन सूद ने बच्चियों से पूछताछ की। इसी दौरान बच्चियों को ढूंढते हुए निंबरी निवासी मां फूलवती और पिता राजेश भी सीडब्ल्यूसी कार्यालय पहुंच गए। वहां उन्होंने तीनों बच्चियों को अपना बताया। अधिकारियों ने मां-बाप से बच्चियों के डाक्यूमेंट मांगे, लेकिन वे कोई डाक्यूमेंट पेश नहीं कर पाए।
रात भर तलाशते रहे बच्चियों को
बच्चियों को अपना बताने वाले राजेश और फूलवती ने बताया कि वे लोग गांव निंबरी में रहते हैं। मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन पोषण करते हैं। सोमवार को वे दोनों मजदूरी पर गए थे। काम खत्म करने के बाद जब देखा तो बच्चे नहीं मिले। वे रातभर अपनी बच्चियों को ढूंढते रहे, लेकिन उनका कहीं पता नहीं लगा।
बच्चियों से पूछने की बात से किया इनकार
दंपति ने अधिकारियों से कहा कि यदि उन्हें उनकी बात पर यकीन नहीं है तो वे बच्चियों से पूछ लें। लेकिन, अधिकारियों ने बच्चियों से कुछ भी पूछने से इनकार कर दिया। सीडब्ल्यूसी अधिकारी का कहना है कि यदि बच्चे आपके हैं तो इन्हें स्कूल क्यों नहीं भेजा। इनकी दशा इतनी खराब क्यों हैं। इस पर दंपति ने गरीबी का दुखड़ा रोया। इसके बाद भी अधिकारी डॉक्यूमेंट पेश करने की बात कहते रहे।
बेर देने के बहाने रिक्शा वाला छोड़ गया
Haryana Police
तीनों बच्चियों में से बड़ी रेखा ने बताया कि वे लोग एक प्लॉट में रहते हैं। शाम को तीनों बहनें खेल रही थीं। एक रिक्शा वाला आया और उन्हें बेर दिए। उसने और बेर देने की बात कहते हुए तीनों को रिक्शा में बैठाया और यहां लाकर छोड़ दिया।
सीडब्ल्यूसी अधिकारी के निर्देश पर तीनों बच्चियों का सिविल अस्पताल में मेडिकल कराकर जाटल रोड शोंधापुर स्थित बाल अनाथालय भेज दिया है। दंपति उनके पास भी आया था, लेकिन उनके पास कोई डाक्यूमेंट नहीं थे। उन्हें डाक्यूमेंट पेश करने की बात कही है।
- गायत्री देवी, जांच अधिकारी, थाना शहर पानीपत।
जीटी रोड पर सोमवार देर रात रोड़ धर्मशाला के पास तीन बच्चियां रोती हुई मिली थी। पुलिस ने परिजनों को तलाश किया, लेकिन परिजन नहीं मिले। सुबह एक दंपति आया और तीनों बच्चियों को अपनी बेटियां बताया। दंपति से बच्चियों के माता-पिता होने के डाक्यूमेंट मांगे गए थे, लेकिन वे कोई भी डाक्यूमेंट नहीं पेश कर सके। जेजे एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए तीनों बच्चियों का मेडिकल करवाकर उन्हें जाटल रोड शोंधापुर स्थित बाल अनाथालय में भेज दिया गया। डाक्यूमेंट पेश करने के बाद बच्चियों को इनके हवाले कर दिया जाएगा।
- सुमन सुद, अध्यक्ष जिला बाल कल्याण समिति, पानीपत