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नुकसान : चंडीगढ़ में तूफान ने बीएसएनएल टावरों पर बरपाया कहर

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चंडीगढ़। एक सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आए तूफान ने भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। टावरों की बिजली आपूर्ति बाधित हुई। इसके कारण बीएसएनएल के 692 टावरों में से 150 टावर बंद हो गए। माइक्रोवेव लिंकिंग खत्म होने से बीएसएनएल के हजारों मोबाइल नेटवर्क खत्म हो गए। इसके कारण लोगों को अपनों से बात नहीं हो पाई। पेड़ गिरने से छह जगहों पर ऑप्टिकल फाइबर केबल कट गए। दो टावर तो जमीन पर आ गए।
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बीएसएनएल सूत्रों के अनुसार मोहाली, खरड़, सन्नी एन्क्लेव, डीसी ऑफिस पंचकूला, अटावा, डडडूमाजरा एरिया की मोबाइल सेवाएं प्रभावित रहीं।
बीएसएनल की इंजीनियरों और टेक्निशियन की टीमें रविवार सुबह पांच बजे से ही इसे ठीक करने में जुट गईं। शाम चार बजे तक इसे पूरी तरह से दुरुस्त कर दिया गया। बिजली चले जाने के कारण अपने सभी टावरों पर जनरेटर सेट चलाकर नेटवर्क को सुचारु किया।
तेज हवाओं के चलने के कारण वायरलेस कनेक्टिविटी पूरी तरह से प्रभावित हुई। माइक्रोवेव लिंकिंग में दिक्कत हुई। इससे हवा के कारण एक सीध में होने वाली सिग्नल नहीं मिल पाए, इस कारण नेटवर्क में काफी समस्याएं आईं। तेज हवा के कारण टावर के उपकरण अपनी पहले जैसी स्थिति में नहीं रही, लिहाजा लाइन ऑफ सिग्नल हिल गई।
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बीएसएनएल के एसडीई अमृतपाल सिंह ने बताया कि विभाग के इंजीनियर और टेक्नीशियन सुबह पांच बजे से ही ठीक करने में जुट गए थे। दोपहर बाद करीब चार बजे से ट्राइसिटी में मोबाइल नेटवर्क बहाल कर दिया। शाम को ही तेज हवाएं चलने के संकेत मिल गए थे। इसके कारण ही शाम में ही कई मोबाइल टावरों में लगे डीजल जनरेटर सेट में डीजल डलवा दिया गया था।
कोटस
तूफान के कारण बीएसएनएल के मोबाइल नेटवर्क को नुकसान पहुंचा है। एक सौ पचास साइट बिल्कुल निल हो गई। इंजीनियरों और टेक्नीशियन की टीमों ने सुबह पांच बजे काम में जुट गए थे। शाम चार बजे से इसे पूरी तरह से दुरस्त कर दिया गया। दो मोबाइल टावर जमीन पर धराशायी हो गए हैं। उसे ठीक किया गया है। सिविल का काम करना बाकी है।
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-एमसी सिंह, महाप्रबंधक बीएसएनएल चंडीगढ़, रोपड़
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