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हुनर के हीरो: लक्ष्मी ने लिखा देश के शहीदों का इतिहास

Mon, 06 Apr 2015 06:20 PM IST
सुनील बैनीवाल/अमर उजाला, हिसार
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‘अपना इतिहास हर कोई जानना चाहता है। हमारे शहीदों ने जाने कितनी कुर्बानियां दी हैं। मैं ऐसे ही गुमनाम शहीदों को सम्मान दिलाना चाहती हूं। मेरे दादा मानसिंह की ख्वाहिश थी, जिसे मैंने पूरा करने की ठान ली।’ यह कहना नेशनल अचीवर अवॉर्डी छात्रा लक्ष्मी कादयान का है।
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गांव ढंढूर की लक्ष्मी कादयान ने गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी नाम से पुस्तक लिख पूरे सभी को चौंका दिया था। लक्ष्मी ने 250 पन्नों की अपनी किताब में हिसार जिले के 425 स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन संबंधी जानकारी प्रस्तुत की है। यह अपने आपमें किसी लड़की द्वारा किया गया सबसे बड़ा कदम था।

इतना ही नहीं कादयान अब प्रदेश भर के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास ढूंढ रही है, जिस पर वे पुस्तक लिखेंगी। लक्ष्मी कादयान फतेचंद महिला कॉलेज में बीए अंतिम वर्ष में पढ़ती है।
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लक्ष्मी को हाल ही गुड़गांव में साहित्य एवं खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए सम्मानित किया गया। यह अवॉर्ड आरएसएस प्रमुख नेता इंद्रेश कुमार और ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के चीफ इमाम अमर अहमद इलियास व सशक्त नारी परिषद की राष्ट्रीय अध्यक्ष दीप आंतिल ने दिया था।

परदादा थे ब्रिटिश सेना में
लक्ष्मी कादयान बताती हैं कि उसके परदादा नंदराम कादयान ब्रिटिश सेना की पंजाब रेजीमेंट में हवलदार के पद पर थे। देश के लिए उन्होंने सिंगापुर और बर्मा की लड़ाई में भाग लिया था। दादा मानसिंह लक्ष्मी को बचपन में परदादा नंदराम कादयान की लड़ाइयों और वीरता की कहानियां सुनाते थे।

उनकी कहानियां सुनकर ही लक्ष्मी के मन में शहीदों के लिए सम्मान बढ़ता गया। जब वह दसवीं क्लास में आई तो शहीदों के लिए कुछ करने की ठानी और अपने पिता जयभगवान कादयान को बताया। पिता ने लक्ष्मी का हौसला बढ़ाया और इसके बाद उसने किताब के लिए डाटा इकट्ठा करना शुरू कर दिया।

जयभगवान कादयान बताते हैं कि मुझे गर्व है कि मेरी बेटी ने शहीदों को सच में सम्मान दिलाया है। मैं एक किसान हूं और अपनी बेटी के सपना को ही पूरा करने में लगा हूं।

मेडल व अखबारों से खोजा इतिहास
लक्ष्मी बताती हैं कि गांव ढंढूर, बीड़ बबरान, चिकनवास, पीरावाली में आजादी की लड़ाई लड़ने वाले 425 स्वतंत्रता सेनानियों को प्लॉट दिए गए थे। मैंने सभी के बारे में पता लगाना शुरू किया। किसी के परिवार वाले ने मेडल दिखाए, किसी ने अखबारों की कटिंग दिखाई। कुछ के परिजनों ने मुझे बताया। मेरे गांव के अलावा अन्य तीनों गांवों के लोग मुझे अपनी बेटी समझते थे और हर संभव मदद करते थे।

ये मिल चुके हैं सम्मान
1. साल 2012 में गांव की सरपंच बाला देवी और एडीसी अशोक कुमार गर्ग ने सम्मानित किया।
2. 15 अगस्त 2012 को स्टेट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
3. 23 मार्च साल 2015 में शहीद दिवस पर हरियाणा गौरव अवॉर्ड से नवाजा गया। पूर्व लेफ्टीनेंट जनरल डीपी वत्स ने सम्मानित किया था।
4. 2 अप्रैल 2015 को नेशनल अचीवर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

मेरा अगला लक्ष्य प्रदेश के शहीदों को सम्मान दिलाना है। इसलिए प्रदेश के शहीदों के बारे में जानकारियां इकट्ठा कर रही हूं। मेरे पापा ही मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं और उन्हीं की मदद से मैं अपना यह लक्ष्य भी पूरा करूंगी।’
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- लक्ष्मी कादयान
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