एनआरआई बहन के अपमान से योगराज सिंह एकदम आहत हैं। प्रेस कांफ्रेस में यह साफ दिखाई पड़ा। पूर्व क्रिकेटर एवं अभिनेता योगराज सिंह और चंडीगढ़ के रिटायर्ड डीएसपी आशानंद के परिवार के बीच हुई मारपीट ने अब जुबानी जंग का रूप ले लिया है।
वीरवार को योगराज ने प्रेस कान्फ्रेंस कर डीएसपी के परिवार पर आरोप जड़े। इसके थोड़ी देर बाद ही दूसरे पक्ष ने भी पत्रकारों से वार्ता कर योगराज और उसके परिवार पर उल्टे आरोप लगाए। चंडीगढ़ प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता में योगराज सिंह की एनआरआई बहन ने कहा कि उनके साथ अभद्र व्यवहार हुआ।
बेटी का रेप करने की धमकी देते हुए उसे घसीटा गया। जिस रात मारपीट हुई उसी रात वह शिकायत देने सेक्टर-5 थाने में गए। वहां कई घंटे बैठने के बावजूद उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। थाने में मौजूद पुलिस कर्मियों से कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई कुछ सुनने को तैयार नहीं था।
'बेटी को खींचकर ले जा रहे थे घर'
सेक्टर-5 थाने में मौजूद पुलिस कर्मियों से कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई कुछ सुनने को तैयार नहीं था। उल्टा उन्हें ही पासपोर्ट जब्त करने और वापस नहीं जाने की धमकी दी गई। थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन पर दबाव और वह कुछ नहीं कर सकने की कहकर कई घंटे थाने में बैठाए रखने के बाद उन्हें घर जाने दिया।
एनआरआई महिला के मुताबिक जिन लोगों के खिलाफ मारपीट व अभद्र व्यवहार करने की शिकायत लेकर आए थे, पुलिस ने उन्हें रात को एक बार भी थाने में नहीं बुलाया। सुबह उन्हें गिरफ्तार कर सीधा कोर्ट में पेश किया गया। महिला के मुताबिक मारपीट की वजह पार्किंग नहीं बल्कि आशानंद की ओर से परेशान किए जाने को लेकर हुई।
उस रात भी जब भाई योगराज के घर से वापस सेक्टर-2 पहुंचे तो उनकी बेटी गाड़ी से उतरकर अंदर जाने लगी तो आशानंद और उसके बेटों सुमित व सुनील ने तान्या को पकड़कर खींचा और घर के अंदर लेकर जाने की कोशिश की।
वह गाड़ी में ही थी, क्योंकि उन्हें कहीं और जाना था। लेकिन, जब उन्होंने आवाज सुनी तो वह गाड़ी से बाहर आए। तब तीनों बोल रहे थे कि एनआरआई को सबक सीखाना है।
योगराज अब करेंगे महिलाओं की सुरक्षा
योगराज की एनआरआई बहन ने बताया कि जब उनका बेटा और परिवारिक दोस्त डॉ. भूपेंद्र गाड़ी से निकल कर बेटी को बचाने के लिए भागे। आशानंद और उसके बेटों ने उन्हें भी हथियारों से पीटा। एनआरआई महिला के मुताबिक उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है, उल्टा केस दर्ज कर दिया गया।
योगराज पहले तो अपनी पुरानी जिंदगी को बयां करते रहे, लेकिन जब मीडिया ने कुछ सवाल पूछे तो योगराज झेंप गए। कुछ सवालों पर तो उन्होंने मीडिया को चुप रहने तक की सलाह दे डाली।
बाद में योगराज साइड में बैठ गए, लेकिन कुछ देर बाद फिर सामने आए। योगराज ने कहा कि उनके वकील को भी धमकी दी गई कि कोर्ट के बाहर सबक सीखाएंगे। योगराज के मुताबिक उन्होंने कसम खा ली है कि महिलाओं की रक्षा करना अब उनका मकसद होगा।
रिटायर डीएसपी ने खुद को बताया बेकसूर
चंडीगढ़ में योगराज सिंह की प्रेस कान्फ्रेंस के बाद दूसरे पक्ष से रिटायर्ड डीएसपी आशानंद ने भी परिवार के सदस्यों के साथ पत्रकारों से वार्ता की। इसमें उन्होंने खुद को बेकसूर बताया। आशानंद के मुताबिक 24 अगस्त की रात वह घर के बाहर खड़े थे।
तभी डॉ. भूपेंद्र आए और उन पर इनोवा गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की। किसी तरह वह साइड होकर बचे। आशानंद के मुताबिक इस पर उन्होंने भूपेंद्र से आपत्ति जताई तो उन्होंने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। साथ ही एनआरआई महिला के उसके बेटे को भी बुला लिया।
दोनों ने उनसे मारपीट की और जब बीच-बचाव करने उनके एडवोकेट बेटे सुमित व सुनील आए तो उनके साथ भी मारपीट की गई। बाद में योगराज सिंह अपने कुछ साथियों को लेकर वहां पहुंच गए और उनसे मारपीट की।
आशानंद के मुताबिक उन्होंने व उनके बेटों ने किसी भी महिला से अभद्रता नहीं की। रिटायर्ड डीएसपी ने कहा कि उन पर लगाए जा रहे आरोप गलत हैं। जो भी झगड़ा हुआ, वह खुद को बचाने के लिए हुआ।