बेटी तेरे जज्बे को सलाम। छोटा कद और कम उम्र के चलते हॉकी में उसके हुनर को तव्वजो नहीं मिली। लेकिन उसने हार नहीं मानी और हॉकी के बाद कुश्ती में दांव आजमाया। फिर क्या था एक के बाद एक कई पदकों की झड़ी लगा दी। आज उसे अपने इस फैसले पर नाज है।
जी हां हम बात कर रहे हैं कुश्ती की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी ललिता सहरावत की। सहरावत ने कुश्ती के खेल में अपने प्रदर्शन के दम पर प्रदेश व देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकाया है।
ललिता अपने खेल करियर में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक पदक जीत चुकी हैं। ललिता ने अभी हाल ही कजाखिस्तान में हुए इनविटेशन कप में स्वर्ण पदक जीत वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए अपना दावा मजबूत कर चुकी है।
यूं शुरू हुआ करियर
ललिता ने शुरुआत में स्कूल स्तर पर हॉकी खेलना शुरू किया था। मगर टीम में सबसे छोटी होने के चलते उसका सेलेक्शन नहीं हो पाता था। स्कूल के पीटीआई ने ललिता के पिता से उसे कुश्ती गेम में डालने का सुझाव दिया। ललिता ने जब कुश्ती खेलना शुरू किया, उस समय वह 10 वर्ष की थी। ललिता ने एक साल के अंदर ही इस खेल में पदक जीतने शुरू कर दिए। इसके बाद वे शहर आ गए और ललिता को प्रेक्टिस के लिए महावीर स्टेडियम में भेजने लगे। कुछ समय बाद उन्होंने साई में उसका दाखिला करा दिया, जहां कोच कुलवंत सिंह ने उसे कोचिंग दी।
बेटी पर है नाज
ललिता के पिता जोगेंद्र सहरावत के मुताबिक उन्हें अपनी बेटी पर नाज है। उनके मुताबिक वह पहले गांव खरड़ अलीपुर में रहते थे। मगर बेटी के करियर के चलते वह शहर आए। उनका कहना है कि जब भी ललिता कोई पदक जीतती है, तो उन्हें बहुत खुशी होती है।
ललिता की मां उषा सहरावत का कहना है कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। उधर ललिता के मुताबिक वह वर्ल्ड चैंपियनशिप व ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना चाहती है।
ये हैं उपलब्धियां
- वर्ष 2010 में यूथ ओलंपिक में रजत पदक।
- वर्ष 2011 में सब जूनियर एशिया चैंपियनशिप में रजत पदक।
- वर्ष 2011 में सब जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक।
- वर्ष 2012 में जूनियर एशिया चैंपियनशिप में कांस्य पदक।
- वर्ष 2014 में जूनियर एशिया कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक।
- वर्ष 2014 में कॉमनवेल्थ खेलों में रजत पदक।
- वर्ष 2015 में सीनियर एशिया चैंपियनशिप में कांस्य पदक।
- वर्ष 2015 में इनविटेशन कप में स्वर्ण पदक।