उन्होंने बताया कि उन्हें खुशी है कि आज उनके संस्थान में कोरोना से बचाव के लिए बने टीके का तीन स्वस्थ व्यक्तियों पर ट्रायल किया गया। जिन वालंटियर में यह इंजेक्शन दिया गया, उन्हें किसी भी प्रकार का कोई रिएक्शन नहीं हुआ। फार्माकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर एवं रिसर्च की प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर डॉ. सविता वर्मा ने बताया कि कोरोना से बचाव के लिए बने टीके को ट्रायल मानव पर शुरू हो गया है।
उनकी इस रिसर्च में कोरोना के प्रदेश स्तर के प्रमुख नोडल अधिकारी एवं पीसीसीएम विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी व कम्युनिटी विभाग के डॉ. रमेश वर्मा को को-इंवेस्टिगेटर बनाया गया है। डॉ. सविता वर्मा ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि रोहतक के स्वस्थ्य युवाओं को यह इंजेक्शन लगवाने के लिए आगे आना चाहिए ताकि जल्द जांच पूरी हो सके।
वहीं, प्रदेश के कोविड-19 के प्रमुख नोडल अधिकारी डॉ. ध्रुव चौधरी ने बताया कि वैक्सीन की सुरक्षा हैदराबाद आधारित कंपनी, भारत बायोटेक द्वारा पशु अध्ययन में पहले ही साबित हो चुकी है, जो इस वैक्सीन के डेवलपर भी हैं। डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि यह परीक्षण दो चरणों में करने की योजना है।
पहले चरण में संस्थान 375 और दूसरे चरण में 750 वालंटियर होंगे। वैक्सीन का प्रतिरक्षण स्वस्थ स्वयंसेवकों में प्रयोग करने के लिए संस्थागत नैतिक समिति से नैतिक मंजूरी ली गई है। इस अवसर पर निदेशक डॉ. रोहताश यादव, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एमजी वशिष्ठ, डॉ. पवन, डॉ. दीक्षा, जनसंपर्क विभाग के इंचार्ज डॉ. वरूण अरोड़ा, डॉ. अमरीश उपस्थित रहे।
रिसर्च में शामिल होने के लिए युवा करें संपर्क
डॉ. ध्रुव चौधरी ने कहा कि कोई भी इच्छुक व्यक्ति पीजीआईएमएस की कोविड हेल्पलाइन 9416447071 पर फोन करके इस ट्रायल का हिस्सा बनने के लिए अपना पंजीकरण करवा सकता है। फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. एमसी गुप्ता ने बताया कि जिन वालंटियर को यह वैक्सीन दी जाएगी, उनमें इस कम या ज्यादा होने वाले दुष्प्रभावों पर लगातार नजर रखी जाएगी, इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।