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कैसे होगी पढ़ाई.. पीयू ने 14 अतिथि संकाय की तैनाती को नहीं दी मंजूरी

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चंडीगढ़। पीयू के कांस्टीट्यूएंट कॉलेज में दूसरे सेमेस्टर की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई, लेकिन शिक्षकों की संख्या कम होने के कारण विद्यार्थी परेशान हैं। 24 मार्च से ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है, लेकिन कई विषयों की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है। बलाचौर स्थित पीयू कांस्टीट्यूएंट कॉलेज को 14 अतिथि संकाय शिक्षकों की आवश्यकता है। पीयू को इनकी तैनाती के लिए आदेश जारी करने हैं, जिसमें देरी हो रही है। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि दो से तीन दिन में यह तैनाती हो जाएगी।
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बलाचौर स्थित पीयू कांस्टीट्यूएंट कॉलेज में सैकड़ों विद्यार्थी शिक्षा पाते हैं। स्थायी शिक्षकों के अलावा यहां अतिथि संकाय व अनुबंध के शिक्षक कार्य करते हैं। 25 से अधिक शिक्षक यहां तैनात हैं। कुछ दिनों पहले 14 अतिथि संकाय की दोबारा तैनाती पीयू की ओर से की जानी थी, लेकिन अब तक उनके आदेश जारी नहीं किए गए। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्राचार्य डॉ. सुनील खोसला का कहना है कि पीयू की ओर से अतिथि संकाय की दोबारा तैनाती के आदेश दो से तीन दिन में जारी हो जाएंगे। बाकी शिक्षक पढ़ा रहे हैं।
आरटीआई के तहत नियुक्ति के बारे में मांगी जानकारी, लेकिन नहीं दी जानकारी
इस कॉलेज में अतिथि संकाय की नियुक्ति कौन करता है और उनके नियुक्ति पत्र की कॉपी आरटीआर के तहत कार्यकर्ता डॉ. राजिंदर के सिंगला ने मांगी। आरोप है कि पीयू के डिप्टी रजिस्ट्रार ने यह आरटीआई सभी कांस्टीट्यूएंट कॉलेजों को भेज दी। कॉलेजों ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। बताया जाता है कि पीयू के ही अधिकारियों को यह कार्य करना है, लेकिन वह जानकारी देने से बच रहे हैं। आरटीआई कार्यकर्ता राजिंदर सिंगला ने कहा कि बलाचौर कॉलेज के विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना शिक्षकों के कैसे हो रही है। बड़ी संख्या में अतिथि संकाय चाहिए जो तैनात नहीं किए गए। उन्होंने डिप्टी रजिस्ट्रार पर वीसी से कार्रवाई की मांग की है।
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पीयू में भी शिक्षकों की भर्ती पर रास्ता साफ नहीं
पीयू में शिक्षकों की भर्ती को लेकर रास्ता साफ नहीं हो पाया है। दो साल से स्थायी शिक्षकों के पद नहीं भरे गए। 26 शिक्षकों की भर्ती निकाली गई थी। पीयू के पास एक हजार से अधिक लोगों के आवेदन भी आए, लेकिन साक्षात्कार तक प्रकरण नहीं पहुंच पाया। इसके अलावा अस्थायी शिक्षकों की भी भर्तियां करने की योजना थी। 21 पद निकाले गए थे, उन पर भी रोक लग गई। इसी तरह अतिथि संकायों पर भी निर्णय नहीं हो सका यानी हर बार कोई न कोई पेंच फंस रहा है। भर्तियां न होने के कारण विद्यार्थियों का नुकसान है। साथ ही शिक्षकों पर भी अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
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