पंजाब विश्वविद्यालय को एनआरआई कोटे से होने वाले दाखिलों के लिए नियम बनाने थे लेकिन इस पर पूरा काम नहीं हो पाया है। कुछ नियम बने भी हैं तो वे भी विद्यार्थियों को पता नहीं चले हैं। यदि नियमों को जल्द सार्वजनिक नहीं किया गया तो फिर से एनआरआई सीटें खाली रह सकती हैं। इन्हीं नियमों के आधार पर एनआरआई अधिक से अधिक दाखिले लेंगे और उसी के मुताबिक उन्हें सुविधाएं दी जा सकेंगी।
पीयू के 78 विभागों में एनआरआई स्टूडेंट्स के लिए सीटें निर्धारित की गई हैं। दो से लेकर छह सीटें हर विभाग या कोर्स में हैं। 400 से अधिक सीटें एनआरआई स्टूडेंट्स के लिए हैं लेकिन यह एडमिशन के दौरान नहीं भर पाती हैं। कई विभागों को एनआरआई स्टूडेंट मिल ही नहीं पाते हैं। इस कारण खाली सीटों का प्रकार बदलकर यह अन्य विद्यार्थियों को दे दी जाती हैं।
पीयू चाहता है कि सीटें खाली न रहें और एनआरआई स्टूडेंट भी आएं, इसलिए पीयू एनआरआई को आकर्षित करने के लिए नए नियम बनाने की तैयारी में जुटा था लेकिन कितना इस पर काम हुआ, यह किसी को पता नहीं चल पाया। सूत्रों का कहना है कि कुछ छूट इन स्टूडेंट्स को दी जा सकती हैं लेकिन नियमों की जानकारी होना जरूरी है। हालांकि इस बार पीयू के लिए सभी सीटें भरना चुनौती भी होगी क्योंकि पूरी दुनिया में कोरोना फैला हुआ है। इन छात्रों को कैसे आकर्षित किया जा सकेगा, ये तो नियम तय करेंगे।