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Chandigarh News: हाईकोर्ट को अगले 50 वर्ष में कितनी भूमि की आवश्यकता, सभी पक्ष मिलकर करें तय

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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को आने वाले 50 साल की जरूरत को देखते हुए कितनी भूमि की आवश्यकता है, यह तय करने के लिए प्रशासन, हाईकोर्ट बार, हाईकोर्ट रजिस्ट्रार, कर्मचारी एसोसिएशन व अन्य सभी पक्षों को बैठक करने का आदेश दिया है। इस बैठक में तय किया जाएगा कि हाईकोर्ट की असल जरूरत कितनी है और तय होने के बाद यह भूमि सारंगपुर मे उपलब्ध करवाने का पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिया है।पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट कर्मचारी संघ के सचिव विनोद धाटरवाल व अन्य ने याचिका में बताया था कि रोज करीब 10000 वकील, 3300 कर्मचारी, वकीलों के 3000 क्लर्क हरियाणा और पंजाब के एजी कार्यालय के कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों, याचिकाकर्ताओं व अन्य लोगों का बोझ हाईकोर्ट परिसर पर होता है। 10000 कार और हजारों दोपहिया वाहनों के बोझ को हाईकोर्ट का मौजूदा परिसर सहन करने में सक्षम नहीं है। हाईकोर्ट में लंबित पांच लाख से अधिक याचिकाओं को समायोजित करने के लिए शायद ही कोई जगह है। सुरक्षा और आपातकाल की नजर से देखें तो एक छोटी सी घटना के कारण भगदड़ मच सकती है, जिसके अकल्पनीय नुकसान हो सकते हैं। 2012 में हाईकोर्ट की इमारत का विस्तार हुआ था, लेकिन समय के साथ बोझ बढ़ता जा रहा है और परिसर विस्तार समय की जरूरत हो गया है।
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मामले की सुनवाई शुरू होते ही हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन से सारंगपुर में भूमि अलॉटमेंट पर जवाब मांगा, तो प्रशासन की ओर से पेश हुए सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल अमित झांजी ने बताया कि उन्होंने हाल ही में पद संभाला है और उन्हें इस मामले में कुछ मोहलत दी जाए। हाईकोर्ट को उन्होंने बताया कि प्रशासन सैद्घांतिक तौर पर भूमि देने को तैयार है, लेकिन कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी जरूरी हैं। हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि प्रशासन को हाईकोर्ट की भूमि की आवश्यकता को लेकर संशय है और इसी लिए आनाकानी की जा रही है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले का सही समाधान निकालने के लिए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार, बार एसोसिएशन, कर्मचारी एसोसिएशन, प्रशासन व अन्य पत्र मिल कर बैठक करें और इन बैठकों के बाद तय किया जाए कि हाईकोर्ट को कितनी जमीन की आवश्यकता है। यह तय करते हुए अगले 50 साल की जरूरत को ध्यान में रखा जाए।
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आईआईटी रुड़की की टीम ने सौंपी अंतरिम रिपोर्ट
1. वर्तमान में वकीलों के जो चैंबर मौजूद हैं, उनमें दो और मंजिलों का निर्माण किया जा सकता है।
2. एडवोकेट जनरल कार्यालय की इमारत में भी दो अतिरिक्त फ्लोर का निर्माण किया जा सकता है।
3. सेक्टर 17 में मौजूद चैंबरों में भी अतिरिक्त निर्माण की संभावना मौजूद है।
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