ओलंपिक क्वालिफायर की तैयारियों से लेकर रियो जाने तक साक्षी मलिक ने विषम परिस्थितियों में अभ्यास किया। पहले तीन महीने तक कोच नहीं मिला। किसी तरह कोच मिला तो विदेश में ट्रेनिंग तक नहीं दी। ऐसी चुनौतियों से पार पाकर साक्षी ने देश के लिए रियो ओलंपिक में पहला मेडल जीता।
जब ओलंपिक क्वालिफायर का दौर शुरू हुआ तो सर छोटूराम स्टेडियम से कुश्ती कोच का तबादला पानीपत हो गया। दिसंबर 2015 में कोच का तबादला होने के बाद वहां कोच की तैनाती नहीं हुई तो पहलवानों को प्रैक्टिस में परेशानी होने लगी। सीनियर खिलाड़ी ही प्रैक्टिस कराते थे, इससे खेल जारी रहे। साक्षी मलिक समेत कई पहलवान जब खेलमंत्री अनिल विज के पास तक पहुंचे तो उन्होंने भी उस समय कोई तवज्जो नहीं दी।
बाद में जिला स्तर के अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद कुश्ती कोच की तैनाती हुई। तीन महीने तक कोच नहीं होने के बावजूद साक्षी ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। उसके बाद भी समस्याएं खत्म नहीं हुईं। ओलंपिक में विदेशियों के दांवपेंच इस्तेमाल कर सके, उसके लिए प्रैक्टिस करने को पुरुष पहलवानों को जार्जिया भेजा गया। महिला पहलवानों को साई सेंटर सोनीपत में प्रैक्टिस कराई गई। प्रैक्टिस में बाधाएं आने के बाद भी साक्षी ने हार नहीं मानी और रियो ओलंपिक में देश के लिए पहला मेडल जीता।