निगम सदन की बैठक में एक टेबल एजेंडे को लेकर खूब हंगामा हुआ। भाजपा पार्षद बैठक में सेलवेल कंपनी को टॉयलेट के रखरखाव का ठेका देने के खिलाफ टेबल एजेंडा लेकर आए थे।
मेयर हरफूलचंद्र कल्याण ने एजेंडा स्वीकार ही नहीं किया। इस पर भाजपा पार्षद भड़क गए और हंगामा शुरू कर दिया।
विपक्ष के नेता अरुण सूद ने कहा कि 4 पार्षदों के साइन करवाकर टेबल एजेंडा लाया गया है और एक्ट के मुताबिक उन्हें एजेंडा स्वीकार करना पड़ेगा।
भाजपा पार्षदों के बार-बार कहने पर भी मेयर ने एजेंडा नहीं लिया। मेयर ने इतना तक कह दिया कि मेरी मर्जी है, मैं नहीं लूंगा एजेंडा।
वाद-विवाद बढ़ता देख राष्ट्रगीत शुरू कर बैठक खत्म कर दी गई। राष्ट्रगीत के बाद भी बहस बंद नहीं हुई और भाजपा पार्षदों ने मेयर के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
भाजपा के अपने पार्षद साथ नहीं
सेलवेल कंपनी पर मेहरबानी दिखाने के मामले पर भाजपा के अपने ही कुछ पार्षद एकमत नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक भाजपा के कुछ पार्षद ही इसका विरोध कर रहे हैं जबकि कई पार्षद इसमें साथ नहीं दे रहे हैं। कुछ भाजपा पार्षद तो इस मुद्दे पर कुछ बोलने को भी तैयार नहीं है।
मेयर खुद को नियमों व कानून से ऊपर समझने लगे हैं। उन्होने न केवल नियमों का उल्लंघन किया है बल्कि राष्ट्रगीत का भी अपमान किया है।
अरुण सूद, नेता विपक्ष
ये था मामला
शहर के 86 पब्लिक टॉयलेट के रखरखाव केलिए निगम ने 2007 में सेलवेल कंपनी को ठेका दिया था। कंपनी का टेंडर 2012 में खत्म हो गया। कंपनी को एक साल के लिए दोबारा एक्सटेंशन दे दी गई।
एक्सटेंशन पीरियड खत्म होने पर इसी कंपनी को दोबारा टेंडर दे दिया गया। इतना ही नहीं एफएंडसीसी ने भी इसे मंजूरी दे दी।
बड़ी बात तो ये है कि पहले निगम इस कंपनी को एक टॉयलेट के रखरखाव के लिए 12 हजार रुपये दे रहा था। अब नए टेंडर में उन्हें साढ़े 17 हजार रुपये दे रहे हैं।